'ख़ामोश.. सबको बोलने की आज़ादी है'

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    • Author, मधु पाल
    • पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी के लिए

अपनी किताब 'एनिथिंग बट ख़ामोश' के लॉन्च पर बीबीसी से मिले शत्रुघ्न सिन्हा ने राजनीति की बातों को 'शादी में बर्बादी' की बात कहकर किनारे कर दिया.

मुंबई में एक होटल में अपनी बायोग्राफ़ी की लेखिका भारती प्रधान के साथ मौजूद शत्रुघ्न ने कहा कि वह आज रचनात्मक माहौल में हैं और रिकॉर्ड पर कह रहे हैं कि वह राजनीति के सवाल टाल रहे हैं.

शत्रुघ्न ने बीते कुछ सालों में ख़ुद पर किए गए तंज़, अपने विरोधी माहौल को लेकर कहा,"लोग जो कहते हैं वो कह सकते हैं, लेकिन मैं उनको जवाब अपने अंदाज़ में ही दूंगा. यह किताब भी मेरे आलोचकों को मेरा एक जवाब है."

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उन्होंने बीते दिनों ट्विटर के माध्यम से जेएनयू विवाद में गिरफ़्तार छात्र कन्हैया का साथ दिया था.

जेएनयू या कन्हैया के समर्थन में सीधे तौर पर तो नहीं, लेकिन वो सभी को बोलने की आज़ादी का हक़ रखने की बात करते हुए कहते हैं, "देखिए यह डेमोक्रेसी है और यहां सभी को अपनी बात रखने की आज़ादी है. आप अपना काम करते रहिए, लेकिन आप किसी को अपनी बात रखने से नहीं रोक सकते."

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वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को अपना गुरु मानने वाले शत्रुघ्न को भाजपा ने बिहार चुनाव के दौरान तक़रीबन किनारे कर दिया था, जिसका गुस्सा उन्होंने जमकर निकाला था.

इन मुद्दों पर दोबारा बात करने के बजाय शत्रुघ्न ने कहा कि वह अपनी स्थिति को एक उदाहरण से समझाना चाहेंगे.

उन्होंने कहा, "लोग आप पर पहले हँसते हैं, फिर आपको ताने देते हैं, फिर आपको इग्नोर करते हैं और फिर कोशिश करते हैं कि किसी तरह से आपका दमन हो जाए. लेकिन जो इस चौथी प्रक्रिया 'दमन' को पार कर लेता है उसे ही 'सम्मान' मिलता है."

शत्रुघ्न ने आगे कहा, "फ़िलहाल आप मान सकते हैं कि मैं 'दमन' और 'सम्मान' के बीच कहीं हूँ और कोशिशें जारी हैं दोनों और से."

शत्रुघ्न बार-बार यह साफ़ कर रहे थे कि वो अपनी किताब के लिए यहां आए हैं और किताब से बाहर वह किसी चीज़ के बारे में बात नहीं करना चाहते.

अमिताभ से उनकी लड़ाई, उनके रोमांस के क़िस्से, उनकी राजनीतिक विफलताएं इन सभी को किताब में भी उन्होंने इस तरह लिखा है जिससे उन लोगों की गरिमा बनी रहे जो उनके जीवन में मौजूद रहे.

शत्रुघ्न ने बताया, "रोमांस मेरे जीवन में रहा लेकिन हमने (लेखिका भारती प्रधान और शत्रुघ्न) यह ध्यान रखा है कि किसी महिला की छवि को कोई चोट न पहुँचे क्योंकि अब वह एक मुक़ाम पर हैं. उनका भी एक परिवार है."

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शत्रुघ्न सिन्हा अपनी जीवनी पर फ़िल्म बनाना चाहते हैं, लेकिन लेखिका भारती प्रधान की इच्छा के विरुद्ध वह अपने रोल में अभिनेता रणवीर सिंह को नहीं, बल्कि अपने बच्चों लव या कुश में से किसी को लेना चाहते हैं.

पूरे साक्षात्कार के दौरान शत्रुघ्न बार-बार कहते रहे कि वो राजनीतिक सवालों पर टिप्पणी नहीं करेंगे लेकिन अंत में वो शायराना अंदाज़ में बोले,"लम्हे-लम्हे की सियासत पर नज़र रखते हैं....मार ही डाले ये दुनिया बेमौत, लेकिन हम ज़िंदा हैं और जीने का हुनर रखते हैं."

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