'मेरा वो मतलब नहीं था': अधूरे रिश्ते की कहानी

मेरा वो मतलब नहीं था

इमेज स्रोत, Chirantana Bhatt

    • Author, चिरंतना भट्ट
    • पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

दिल्ली के लोधी गार्डन की एक बेंच पर जब हेमा रॉय और प्रीतम चोपड़ा मिले तब दिल्ली की उस सुबह में दो ज़िंदगियों की किताबें खुल गई.

एक ऐसी किताब जिसमें थी 35 सालों की यादें, किस्से, वाकए, जो कभी एक दूसरे तक नहीं पहुंचे थे.

‘मेरा वो मतलब नहीं था’ नाटक लिखा और निर्देशित किया है मंझे हुए कलाकार राकेश बेदी ने. और इसमें अभिनय कर रहे हैं अनुपम खेर और नीना गुप्ता.

और जब एक बार ये किरदार मंच पर आते हैं तब एक अधूरे रिश्ते के मतलब को अंज़ाम मिलने का सफर शुरु हो जाता है, जिसका नाम है 'मेरा वो मतलब नहीं था'.

कहानी

मेरा वो मतलब नहीं था

इमेज स्रोत, Chirantan Bhatt

35 साल के बाद मिलने वाले प्रीतम और हेमा के मन में कई सवाल, कई गलतफ़हमियां थी जिन्हें दूर करने के लिए ये मुलाकात अहम ज़रिया बनती हैं.

बंगाली मूल की हेमा 35 साल पहले प्रेमी प्रीतम से दूर होकर शांतिनिकेतन चली जाती है और उसे प्रीतम की चिट्ठीओं के जवाब नहीं मिलते. वहीं प्रीतम की चिट्ठीयां हेमा तक नहीं पहुंचती और दोनो मान लेते हैं अब रिश्तों की राहें बदल चुकी हैं.

हेमा की शादी एक गरम मिजाज़ आदमी से हो जाती है और वह बड़ी मुश्किल से अपना घर चलाती है. वहीं प्रीतम हेमा को बतातें हैं कि कैसे अपनी मां के कहने पर उन्होंने सीधी सादी मुसलमान लडकी निगार से शादी कर ली.

हसी, गुस्सा, दर्द और सदमे की परतों के बीच यह कहानी आगे बढ़ती है.

मंच पर दिग्गज

मेरा वो मतलब नहीं था

इमेज स्रोत, Chirantana Bhatt

इस नाटक का फ़ॉर्मेट बहुत दिलचस्प है क्यूंकि पात्रों का फ्लैशबैक मंच पर बडे स्क्रीन पर देखने मिलता है. प्रीतम हेमा को बताते हैं की निगार के भाइजान उन्हें फ़ोन पर अपनी बहन को संभालने की मीठी धमकी देते थे. और दर्शकों को निगार के भाईजान, अभिनेता सतिश कौशीक स्क्रीन पर से प्रीतम यानि अनुपम खेर के साथ बात करते दिखाई देते हैं.

इस फ़ॉर्मेट की वजह से मंच पर अनुपम खेर, नीना गुप्ता और कुछ पलों के लिए दिखने वाले राकेश बेदी के अलावा हमें हेमा-प्रीतम के परिवार के पात्रों का भी परिचय होता है.

बीबीसी हिंदी से बात करते वक्त राकेश बेदी और अभिनेता अनुपम खेर ने इस फ़ॉर्मेट के बारे में कहा, ‘यह फ़ॉर्मेट नाटक बनाते बनाते ही बना है, इस ज़रिए से नाटक इवाल्व हुआ है और टीम अच्छी होने की वजह से हम यह कर पाए.’

राकेश बेदी

इमेज स्रोत, Chirantana Bhatt

नीना गुप्ता कोलकाता में रही बंगाली हेमा रॉय से अचानक चांदनी चौक में पली बढ़ी मुसलमान लड़की निगार बन जाती हैं और दर्शको को यह बदलाव खटकता नहीं. राकेश बेदी ने छोटे से रोल में कॉमिक रिलीफ़ भी दी है तो संवेदनाओं को भी बटोरा है.

‘मेरा वो मतलब नहीं था’ थिएटर के चाहने वालों को अभिनय, लेखन और दिग्दर्शन के अलग स्तर को जानने के लिए एक बार ज़रुर देखना चाहिए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक कर</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)