मैं प्रेशर नहीं लेती: कल्कि
- Author, वंदना
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
फ़िल्म अभिनेत्री कल्कि कोचलीन का कहना है कि उनके लिए खुद को चुनौती देना सबसे अहम है और यही वजह है कि वह सीधे-सादे रोल में नज़र नहीं आतीं.
उनका कहना है कि वह हर रोल में कुछ वास्तविकता, विश्वसनीयता ढूंढती हैं.
वह कहती हैं कि अगर किसी किरदार में उनका विश्वास नहीं तो दर्शक कहां से यकीन करेंगे.
पढ़ें, कल्कि के साथ विस्तृत बातचीत

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ज़्यादातर फ़िल्मों में आपका रोल एक उलझी हुई, पहचान तलाशती लड़की का होता है. क्या निर्देशक ऐसे ही रोल आपके लिए लाते हैं या ये आपका चुनाव होता है?
दोनों ही बातें हैं. मैं फ़िल्मों में वास्तविक क़िरदार निभाना चाहती हूं. सीधे-सादे रोल मैं नहीं चुनती हूं.
लोग मेरे ऊपर डार्क रोल्स का ठप्पा भी लगाते हैं लेकिन मैं हर तरह का रोल करना चाहती हूं, जैसे मैंने 'ये जवानी है दीवानी' में किया था.
मसाला फ़िल्मों और हक़ीकत के नज़दीक फ़िल्में करने में आपको किसमें ज़्यादा अच्छा लगता है?
मेरे लिए सबसे अहम है खुद को चुनौती देना या अपने डर से उबरना. व्यावसायिक फ़िल्मों में काम करना भी मेरे लिए एक चुनौती है, जैसे कि मैं डांस नहीं कर सकती क्योंकि मैं एक बुरी डांसर हूं. इसी तरह कॉमेडी करना भी बहुत मुश्किल है.

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किसी फ़िल्म के किरदार को निभाने के लिए आप क्या तैयारी करती हैं?
यह निर्भर करता है कि रोल कैसा है, जैसे मेरी आने वाली फ़िल्म 'मार्गरीटा विद अ स्ट्रॉ' में मैं पूरी शूटिंग के दौरान व्हील चेयर से उठी ही नहीं.
मनोवैज्ञानिक रूप से इसने मुझे किरदार निभाने में बहुत मदद की क्योंकि फ़िल्म में मैं सेरेब्रल पैल्सी से पीड़ित हूँ.
मेरे दोस्तों ने बताया कि असल ज़िंदगी में मेरे हाव-भाव वैसे ही होने लगे थे जैसे व्हील चेयर पर बैठी उस लड़की के रहे होंगे. लेकिन ज़्यादातर वक्त मैं इतना नहीं सोचती और उस किरदार से बाहर निकल आती हूं.
आप इतने जटिल किरदार निभाती हैं लेकिन असल ज़िंदगी में आप कैसी हैं?
मुझे ट्रेकिंग और किताबें पढ़ना पसंद है. मैं बहुत साधारण और बोरिंग लड़की हूं, शायद इसलिए मैं इतने जटिल किरदार निभाता चाहती हूं.

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एक किरदार निभाने के बाद उसका अहसास आपकी निजी ज़िंदगी में कितना रह जाता है?
यह उस किरदार की गहराई पर निर्भर करता है. सेरेब्रल पैल्सी से पीड़ित लड़की का रोल करते समय मैं असल ज़िंदगी में भी हाथ में चीज़़ें अलग तरीके से पकड़ने लग गई थी.
कितना मुश्किल है इस दौर में स्टार होना?
मैं वही करती हूं जो मैं करना चाहती हूं. मैं अपने ऊपर एक बड़ी हीरोइन बनने का प्रेशर नहीं पालती हूं. हाँ ये ज़रूर लगता है कि निजी ज़िंदगी को अलग रखना है, इसलिए मैं टैबलॉयड भी नहीं पढ़ती.
सोशल मीडिया पर कितना सक्रिय हैं?

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मेरा फ़ेसबुक और ट्विटर अकाउंट है लेकिन फ़ेसबुक को महीने में एक बार चेक करती हूं. ट्विटर अकाउंट को रोज़ देखती हूं, लेकिन बहुत कम ट्वीट करती हूं.
मैं यह नहीं लिखती कि आज मैं डोसा खा रही हूं, लेकिन जब किसी फ़िल्म का या थियेटर का प्रमोशन करना होता है या महिलाओं के बारे में कुछ कहना होता है तब मैं लिखती हूँ.
जब कुछ प्रशंसक कोई नेगेटिव कमेंट करते हैं तो मैं कभी-कभी उन्हें सीधे जवाब दे देती हूं और वो हैरान रह जाते हैं. कई बार वे तुरंत माफ़ी मांग लेते हैं.
कोई नई फ़िल्म जो आप शुरू करने जा रही हैं?
एक फ़िल्म शुरू हो रही है, बहुत ख़ूबसूरत कहानी है इस फ़िल्म की. इसका नाम है 'वेटिंग' जिसके निर्देशक हैं इंग्लैंड के अनू मेनन. इस फ़िल्म में नसीरुद्दीन शाह भी हैं.
क्या फ़िल्मों के बीच थियेटर के लिए समय निकाल पाती हैं?

आजकल मैं फ़िल्में ज़्यादा करती हूं, लेकिन बीच-बीच में थिएटर के लिए भी समय निकल आता है. थिएटर मेरा पहला 'प्यार' था.
मैं दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती हूं क्योंकि थिएटर मेरे लिए जिम जैसा है. दर्शकों के सामने अभिनय से खुद में एक आत्मविश्वास आ जाता है.
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