शम्मी कपूर के बेटे आदित्य राज कपूर ने पिता के अफ़ेयर्स को लेकर कई राज़ खोले

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- Author, मधु पाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारतीय फ़िल्मों में कपूर परिवार का योगदान हमेशा से ही अहम रहा है. कपूर परिवार में अभिनय की नींव सबसे पहले रखी कपूर परिवार के मुखिया दिवंगत अभिनेता पृथ्वीराज कपूर ने.
सिनेमा को और बेहतर बनाने और समझने में मदद की उनके बड़े बेटे राज कपूर ने. राज कपूर के साथ-साथ बाकी भाइयों शम्मी कपूर और शशि कपूर ने भी अपने अभिनय से खूब नाम कमाया.
कपूर परिवार का हिंदी फ़िल्मों का लगाव आज भी उनकी पीढ़ी दर पीढ़ी में नज़र आ रहा है. ज़्यादातर कपूर परिवार से जुड़े लोगों ने अपने काम से खूब नाम कमाया है लेकिन कुछ लोग फ़िल्मों में आये ज़रूर लेकिन उन्हें वो शोहरत नहीं मिल पाई जो वो चाहते थे. कुछ ऐसा ही हाल रहा दिवंगत अभिनेता शम्मी कपूर के बेटे आदित्य राज कपूर का.

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बाल कलाकार के रूप में आदित्य की शुरुआत
आदित्य राज कपूर दिवंगत अभिनेता शम्मी कपूर और गीता बाली के बेटे हैं. बचपन में पहली बार बतौर बाल कलाकार के तौर पर काम किया. साल 1963 में उनकी मां गीता बाली की फिल्म 'जब से तुम्हे देखा है' रिलीज़ हुई.
साल 1973 में फिल्म 'बॉबी' आई. अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद पहली बार आदित्य ने अपने ताऊ यानि दिवंगत अभिनेता, निर्देशक और निर्माता राज कपूर की फिल्म 'बॉबी' में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया.
असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर आदित्य कपूर ने 1978 में आई 'सत्यम शिवम सुंदरम', 1985 में आई फ़िल्म 'गिरफ़्तार', 1991 में आई 'साजन', 1993 में 'दिल तेरा आशिक', 1996 में 'पापी गुड़िया' और 1999 में 'आरज़ू' फिल्म में काम किया.
बतौर निर्देशक और लेखक के तौर पर 2007 में आदित्य कपूर ने दो अंग्रेजी फ़िल्में की थीं. इसमें 'डोंट स्टॉप ड्रीमिंग' और 'सांबर सालसा' शामिल थी.

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बतौर अभिनेता फिल्मों में किया काम
आदित्य कपूर ने फिल्मों में अभिनय करने की कोशिश भी की. 2010 में उन्हें जगमोहन मुंध्रा की फ़िल्म 'चेस' में अहम भूमिका निभाने का मौका मिला. इसके बाद उन्हें कई और फ़िल्में जैसे मुंबई 118, दीवानगी ने हद कर दी, इस लाइफ में, यमला पगला दीवाना 2, से यस टू लव जैसी छोटी बड़ी फ़िल्मों में थोड़ा बहुत काम मिलता रहा.
आदित्य कपूर ने फिल्मों के बाद टेलीविजन की दुनिया में भी किस्मत आज़माने की कोशिश की. उन्होंने जाने-माने निर्देशक आशुतोष गोवारिकर के धारावाहिक एवरेस्ट में अभिनय किया.
अभिनय और निर्देशन में किस्मत नहीं चली तो आदित्य ने बिज़नेस में हाथ आज़माया. उनका एक ट्रक और गोदाम का व्यवसाय भी है. उनकी निर्माण कंपनी ने मुंबई में मनोरंजन पार्क फैंटेसी लैंड और दिल्ली में अप्पू घर विकसित किया है.

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पिता शम्मी कपूर के अफेयर्स को लेकर खुलासा
दिवंगत अभिनेता शम्मी कपूर के बेटे आदित्य राज कपूर काफी सालों से फिल्मी दुनिया में हैं लेकिन अचानक वो इन दिनों सुर्खियों में छाए हुए हैं. उनकी ख़बरों में छाने की वजह उनकी आने वाली कोई फ़िल्म नहीं बल्कि हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उनके बयान हैं जो उन्होंने अपने पिता शम्मी कपूर को लेकर दिए हैं.
गीता बाली और शम्मी कपूर की शादी 1955 में हुई थी, लेकिन अभिनेत्री गीता बाली का साल 1965 में चेचक की बीमारी के चलते निधन हो गया था. उस वक्त उनका बेटा आदित्य राज कपूर और बेटी कंचन बहुत छोटे थे. मां का साया उठ जाने से बच्चों के साथ-साथ परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था.
आदित्य राज कपूर ने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में बताया कि जब उनकी मां का देहांत हुआ था तब उनकी उम्र 9 साल की थी. ऐसी मुश्किल घड़ी में राज कपूर की पत्नी कृष्णा ने उन्हें और उनकी बहन को संभाला.

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मुमताज़ से बेहद प्यार, करना चाहते थे शादी
दिवंगत अभिनेता शम्मी कपूर के बेटे आदित्य राज कपूर ने अपने पिता के निजी जीवन के बारे में कई बड़ी जानकारियां सार्वजनिक की हैं. उनका कहना है कि माँ के निधन के बाद पिता शम्मी जी किसी ऐसी महिला की तलाश कर रहे थे, जो उनके बच्चों के जीवन में एक मां की कमी पूरी कर सके. पिता और मुमताज़ के बीच प्रेम था.
उन्होंने बताया, "मुमताज़ अपने करियर में कुछ बड़ा करने के लिए तैयार हो रही थीं और उन्होंने पापा के साथ 1969 में 'ब्रह्मचारी' फिल्म की थी. वे राजेश खन्ना के साथ अपनी पहली फिल्म साइन करने से बस एक कदम दूर थीं. मेरे पिता अपने हीरो वाले दिनों से लौटने लगे थे. उन्होंने अभिनेत्री मुमताज़ से शादी करने की सोची थी."
आदित्य कपूर कहते हैं, "डैड बहुत ही क्लियर थे, वे चाहते थे कि कोई उनके बच्चों की देखभाल करे. वे देख रहे थे कि हमें एक मां की ज़रूरत है. मुझे नहीं लगता कि डैड मुमताज़ जी से शादी करने की सोचकर कुछ गलती कर रहे थे, लेकिन मुझे ये भी नहीं लगता कि मुमताज़ जी का शादी न करके अपने करियर पर ध्यान देने का फैसला भी गलत था. दोनों ही अपनी जगह सही थे. पर ये मुमकिन नहीं हुआ."

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नूतन और नादिरा के साथ भी जुड़ा था नाम
आदित्य ने अपने इंटरव्यू में कहा कि शम्मी कपूर की ज़िंदगी में सिर्फ मुमताज़ ही नहीं थी जिन्हें उनसे प्यार हुआ था. मुमताज़ और गीता बाली से भी पहले उनकी ज़िंदगी में नूतन और नादिरा भी थीं जिनके साथ उनका अफ़ेयर था.
जब एक इंटरव्यू में आदित्य राज कपूर से ये पूछा गया कि उनके पिता शम्मी और एक्ट्रेस नूतन के अफ़ेयर के चर्चे हुए करते थे. उस पर आदित्य कहते हैं, "मैं ये बात जानता हूं, लेकिन ये बात मेरे माता-पिता की शादी से पहले की है. दोनों उस वक्त यंग थे, हालांकि उस समय के हिसाब से उनका फैसला सही नहीं था."
शम्मी कपूर के दूसरे अफेयर का भी ज़िक्र करते हुए आदित्य राज कपूर कहते हैं, "जिंदगी में दूसरी महिला के रूप में एक्ट्रेस नादिरा का नाम सामने आया था, लेकिन मुझे लगता है कि दोनों एक-दूसरे के लिए सीरियस नहीं थे. मेरे पिता उस समय काफी यंग थे और कोई भी निर्णय लेने में सक्षम नहीं थे."

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बीना रमानी का नाम भी शम्मी कपूर के साथ जुड़ा
आदित्य अपने पिता शम्मी कपूर की ज़िंदगी से जुड़ी महिलाओं को याद करते हुए आगे कहते हैं, ''गीता बाली के निधन और मुमताज़ के अफेयर के बाद एक और महिला थीं, जो शम्मी कपूर की ज़िंदगी में आई थीं और उनका नाम था बीना रमानी, जो एक मशहूर लेखक हैं. ये मेरे पिता शम्मी जी का चौथा प्यार थीं, जिनके साथ उनका रिश्ता बेहद कम समय तक ही चला था.''
आदित्य कपूर कहते हैं, "बीना जी के साथ रिश्ता बेहद संक्षिप्त और बात औपचारिक थी."
गीता बाली के जाने के बाद शम्मी कपूर ने दूसरी शादी नीला देवी के साथ की. अपनी दूसरी माँ का ज़िक्र करते हुए आदित्य कहते हैं, ''मेरे पिता ने जब दूसरी शादी करने का फैसला किया था तब इसका ज़िक्र हमसे नहीं किया था. मुझे याद है वो सुबह-सुबह नीला देवी से शादी करके घर आये और हम अपनी आंटी कृष्णा जी के घर पर थे.''

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''मैं तब सिर्फ 13 साल का था. हम जब शाम को डैड से मिले तो उन्होंने नीला को हमसे हमारी मां के रूप में मिलाया था. हालांकि, इससे कोई फर्क नहीं पड़ा और हमने नीला जी का स्वागत बहुत ही प्यार से किया था."
आदित्य कपूर ने बताया, ''मैं उनके पास गया और उन्हें गले लगा लिया. मां मिल गई थी, जिसके बाद मैं बहुत खुश था. कमाल हो गया था. मेरी दूसरी मां नीला देवी बहुत ही दयालु महिला हैं. उन्होंने फैसला किया कि वह हमारे अलावा कोई और बच्चा नहीं चाहती हैं. कितनी महिलाएं ऐसा कर सकती हैं? सबसे बड़ी बात शम्मी कपूर और उनके दो बच्चों की देखभाल करना आसान नहीं था, मैं शर्त लगाता हूं."
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