ऋषि कपूर इन दो अधूरी ख़्वाहिशों के साथ दुनिया छोड़ गए

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- Author, प्रदीप सरदाना
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक
ऋषि कपूर ने अपने 50 साल के फ़िल्मी करियर में एक से एक शानदार फ़िल्में कीं.
राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार और फ़िल्म फ़ेयर सहित बड़े पुरस्कार तो उन्हें अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही मिल गए थे.
लेकिन ऋषि कपूर को एक बात का मलाल हमेशा रहा कि फ़िल्मों में अपना विशिष्ट योगदान देने के बावजूद उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान नहीं दिया.
यूं ऋषि अपने दिल की कुछ ख़ास बातें सार्वजनिक नहीं करते थे. लेकिन जब इस संबंध में कुछ बरस पहले मैंने उनसे बात की तो उनके हृदय की टीस बाहर निकल आई और वह काफ़ी देर तक मुझसे अपने दिल की बातें करते रहे.
असल में एक बार मैंने इस बात पर काफ़ी रिसर्च करके यह जानने का प्रयास किया कि ऐसी कौन सी फ़िल्मी हस्तियाँ हैं, जिनका फ़िल्म संसार में योगदान तो बहुत बड़ा है लेकिन सरकार ने उन्हें अभी तक पद्म पुरस्कार से सम्मानित नहीं किया.
तब सामने आया कि विश्व में अपना और देश का नाम ऊंचा करने वाले दारा सिंह से लेकर शम्मी कपूर तक जैसे दिग्गज अभिनेता को भी पद्म विभूषण या पद्मभूषण तो दूर पदमश्री तक नहीं मिला.
ये लोग दुनिया से विदा भी हो गए. ऐसे ही जीतेंद्र, मुमताज़, ऋषि कपूर और जूही चावला तक कई बेहतरीन कलाकार हैं, इन्हें भी फ़िल्म क्षेत्र में बरसों के अपने उल्लेखनीय योगदान के बाद भी पद्म सम्मान नहीं मिला.
प्रति वर्ष इनसे बहुत जूनियर और ऐसे कलाकारों को भी पद्मश्री मिलता आ रहा है जिनमें से कुछ का तो योगदान भी कुछ ख़ास नहीं है.
तब मैंने पत्रकारों, लेखकों, और कलाकारों की संस्था 'आधारशिला' के अध्यक्ष होने के नाते स्वयं दिसम्बर 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह को एक पत्र लिखकर अपील की थी कि सरकार ऐसे कलाकारों को भी पद्म पुरस्कार दे जिन्हें यह सम्मान बरसों पहले मिल जाना चाहिए था.
लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

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ऋषि कपूर से इस बारे में मेरी बात भी हुई थी. तब ऋषि कपूर ने कहा था- मुझे 42 साल हो गए काम करते हुए. मेरी पहली फिल्म 'बॉबी' 1973 में आई थी और अब 2015 चल रहा है. और यदि मेरी चाइल्ड आर्टिस्ट वाली फिल्म 'मेरा नाम जोकर' को भी लें तब तो अब 45 साल हो गए."

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मैंने कहा कि कितने ही जूनियर कलाकारों को यह सम्मान मिल चुका है, हालांकि मुझे कहते हुए अच्छा नहीं लगता क्योंकि अब तो वह आपके करीबी रिश्तेदार हैं...सैफ अली खान, उन्हें भी पद्मश्री मिल चुका है ...
यहाँ फिर एक बार ऋषि कपूर ने मुझे टोका और बड़ी साफ़गोई से बोले- "देखिए सैफ को भी पद्मश्री मिल गया, क्या कह सकते हैं, सरकार को लगा होगा कि मेरे से ज्यादा योगदान उनका है, चलिए अब क्या कहें, असल में सम्मान समय रहते मिल जाये तो अच्छा है."
कपूर ख़ानदान में पृथ्वीराज कपूर के साथ राज कपूर को भी दादा साहब फाल्के और शशि कपूर को पद्मभूषण मिल चुका है. (यहाँ बता दें जब ऋषि कपूर से मेरी यह बात हो रही थी तब तक शशि कपूर को दादा साहब फाल्के नहीं मिला था लेकिन उसके कुछ दिन बाद ही उन्हें भी फाल्के सम्मान मिल गया था) .
इस पर ऋषि कपूर ने कहा था- "सरकार ने कपूर परिवार को सम्मानित किया यह अच्छी बात है और इसके लिए हमारा परिवार सरकार का आभारी है. लेकिन इसका यह मतलब तो नहीं कि यदि एक परिवार में और भी अच्छे और बड़े कलाकार हैं तो उन्हें भुला दिया जाए. मुझे पद्मश्री नहीं मिला, लेकिन इससे ज्यादा दुख मुझे इस बात का है कि शम्मी अंकल को तो कुछ भी नहीं मिला. जबकि आप जानते हैं शम्मी अंकल जैसे लाजवाब अभिनेता का फिल्म इंडस्ट्री में कितना बड़ा योगदान है. लेकिन वह बिना कोई ऐसा सम्मान पाए दुनिया से चले गए."

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ऋषि कपूर पिछले कुछ समय से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक बहुत बड़े प्रशंसक के रूप में उभरे थे. किसी भी मसले पर वह तुरंत ट्वीट करके अपनी प्रतिक्रिया देते थे.
यहाँ तक गत 22 मार्च को जनता कर्फ़्यू के दौरान शाम को 5 बजे,मुंबई में अपने घर की बालकनी से, ऋषि कपूर थाली को लगातार ऐसे बजाते रहे, जैसे बरसों पहले फिल्म 'सरगम' में उन्होंने 'ढपली वाले ढपली बजा' कर लोगों का दिल जीता था.
ऋषि कपूर का 2 अप्रैल का अंतिम ट्वीट भी जय हिन्द और तिरंगे के निशान के साथ समाप्त होता है. जिसमें ऋषि ने कोरोना की जंग को मिलकर जीतने के साथ पुलिस, डॉक्टर्स, नर्स और अन्य मेडिकल स्टाफ़ आदि पर पत्थर न फेंकने और उनके साथ मारपीट न करने की अपील भी की थी. लेकिन कोरोना की जंग जीतने से पहले वह अपनी ज़िंदगी की जंग हार गए.

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रणबीर की शादी देखने की भी इच्छा भी रह गई अधूरी
ऋषि कपूर को जहां अपने गौरवशाली और महान पिता पर गर्व था वहाँ अपने अभिनेता पुत्र रणबीर कपूर का बेहतरीन अभिनय उनके सीने को चौड़ा कर देता था. अपने ट्विटर बायो पर भी ऋषि ने कुछ समय पहले तक यही लिखा था- "एक प्रसिद्ध पिता का पुत्र और एक प्रसिद्ध पुत्र का पिता".
ऋषि को अपने पुत्र रणबीर के साथ अपनी पुत्री रिद्धिमा से भी बेहद लगाव था. अपनी तमाम व्यस्तताओं के बाद भी वह अपने परिवार के लिए पूरा समय देते थे.
अपनी बेटी की शादी तो उन्होंने 2006 में दिल्ली के भरत साहनी से काफी धूम धाम से कर दी थी. लेकिन पिछले कुछ बरसों से उनकी इच्छा थी कि रणबीर की शादी भी हो जाए.
हालांकि रणबीर पर कभी ऋषि ने शादी का दबाव नहीं बनाया फिर भी वह अपनी ख़राब तबीयत देख चाहते थे कि उनके सामने ही रणबीर की शादी हो जाए.
रणबीर और आलिया भट्ट के प्रेम संबंधों और दोनों की शादी पर सहमति देखते हुए भी ऋषि की यह इच्छा और भी प्रबल हो जाती थी.
जब ऋषि कपूर सितंबर 2018 में अपना इलाज़ कराने न्यूयॉर्क गए थे तब उनके जाते ही ऋषि की माँ कृष्णा कपूर का निधन हो गया. ऐसे में आलिया ने तुरंत उनके घर पहुँच कर ठीक ऐसे ही सभी कार्यों में हाथ बटाया, जैसे घर की कोई बहू काम काज संभालती है.
लेकिन बताया जाता है कि रणबीर और आलिया दोनों अपनी फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' को पूरा करके ही शादी करना चाहते थे. इसलिए ऋषि का रणबीर की शादी देखने का सपना भी पूरा नहीं हो सका.

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