कामिनी कौशल: हिंदी सिनेमा की सबसे उम्रदराज़ अभिनेत्री जो फ़िल्में नहीं देखतीं

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- Author, प्रदीप सरदाना
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार एवं फ़िल्म समीक्षक, बीबीसी हिंदी के लिए
सन 1950 के दशक में फ़िल्म 'बिराज बहू' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फ़िल्मफेयर पुरस्कार जीतने वाली ख़ूबसूरत अभिनेत्री कामिनी कौशल देश की सबसे ज़्यादा उम्र की अभिनेत्री हैं.
पिछले हफ़्ते 25 फ़रवरी को उन्होंने सादगी से मुंबई के अपने घर में अपने जन्म की 95वीं सालगिरह मनाई.
देश में कुछ अरसा पहले तक 93 से अधिक उम्र वाली फ़िल्मी हस्तियों में दिलीप कुमार, चंद्रशेखर वैद्य और लता मंगेशकर जैसे बड़े नाम भी हमारे बीच थे. लेकिन पिछले आठ महीनों में इन तीनों हस्तियों ने इस संसार को अलविदा कह दिया.
अब सिर्फ़ एक कामिनी कौशल ही हमारे पास हैं, जिनकी मौजूदगी भारतीय सिनेमा के सुनहरे दिनों का अहसास कराती हैं.
जन्मदिन से दो दिन पहले मैंने फ़ोन पर तबीयत का हालचाल पूछा तो वो बोलीं, "तबीयत अब क्या ठीक होनी है. ऐसे ही है तबीयत तो.''
मैंने उनसे कहा, "आपका जन्मदिन आ रहा है? तो वो चुप रहीं, मैंने फिर कहा आपका 95वां जन्म दिन!"
उनकी चुप्पी देख, मैंने कहा आप अपना जन्मदिन भूल गईं? उनके साथ बैठी महिला को भी मेरी बात सुनाई दी, तो उधर से भी उन्हें कहा गया- "मम्मी अपना 'बर्थ डे' भूल गईं?

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तभी वे सकुचाते हुए बोलीं- ''ओह... असल में, मैं सोई हुई थी अभी, आपका फ़ोन आने पर ही उठी हूँ. फिर बोलीं थैंक यू! अब तो लोगों की गुड विशेज़ ही चाहिए और क्या?''
जन्मदिन के बारे में पूछे जाने पर उनका जवाब था, "अब क्या जन्मदिन मनाना? बस बच्चे आसपास हों अपने, वो ही ख़ुशी है. वो ही काफ़ी है.''
उनकी देखरेख करने वाली सहायिका ने बताया, ''मम्मी की तबीयत अब पहले जैसी नहीं है. बात करते-करते भूलने भी लगती हैं. अब चलने-फिरने में भी दिक़्क़त है. उन्हें कोई पकड़कर उनके कमरे से बाहर ले जाए तो कभी-कभी बाहर आ जाती हैं, नहीं तो, अब अपने कमरे में ही रहती हैं ज़्यादातर."
उनका जन्मदिन समारोह 6 मार्च के बाद होगा, जब उनके मँझले बेटे श्रवण लंदन से मुंबई आएंगे, तब परिवार के सभी लोग मिलेंगे तो जन्मदिन की पार्टी होगी.

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बेटे राहुल के निधन से टूट गयी हैं कामिनी
असल में कामिनी कौशल की ज़िंदगी अच्छी भली चल रही थी. उनसे बात करके या उनके मुंबई के मालाबार हिल स्थित घर में उनसे मिलकर बहुत अच्छा लगता था. वो बरसों पुरानी बातें अच्छी तरह याद रखती थीं.
कुछ समय पहले उनके बड़े पुत्र राहुल सूद का कोरोना की वजह से निधन हो गया, तो वह बुरी तरह टूट गईं.
राहुल अपनी माँ का ख़्याल रखने को हर पल तत्पर रहते थे, क्योंकि वो उनके घर के पास ही रहते थे. वहीं उनके दो और बेटे श्रवण और विदुर अमेरिका और लंदन में रहते हैं.
फ़रवरी 2020 में जब कामिनी कौशल के जन्म की 93वीं सालगिरह मनाया जाना था, तब भी सारी तैयारियां राहुल ही कर रहे थे. लेकिन 2021 में कामिनी जी के जन्म की 94वीं सालगिरह के पहले कोरोना राहुल को सदा के लिए लेकर चला गया.
राहुल के निधन के बाद कामिनी कौशल की दुनिया बदल गई. अपने बड़े बेटे के न रहने का ग़म उन्हें हर वक़्त सताता रहता है. हालांकि उनके छोटे बेटे विदुर उसके बाद लंदन छोड़कर अपनी माँ के पास मुंबई आ गए हैं.

93 की उम्र तक रहीं दवाओं से दूर
अपनी 93 साल की उम्र तक कामिनी कौशल इतनी स्वस्थ थीं कि कोई दवाई भी नहीं लेती थीं. अब 24 फ़रवरी को जब मैंने उनसे कहा कि मैं चाहता हूँ कि आपकी तबीयत ठीक हो, पहले जब आपको एक दम फिट देखता था, तो बहुत अच्छा लगता था.
इस पर उन्होंने हँसते हुए कहा, ''अब और कितनी ठीक रहूंगी? हो गया बहुत अब क्या? फिर भी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद!''
मैंने कहा अब आप अपने कमरे से बाहर कम ही निकलती हैं, पहले तो आप कोई दवाई भी नहीं लेती थीं. अब तो शायद कुछ दवा ले रही हैं?
यह सुनकर उन्होंने तपाक से कहा, "वॉक तो अब भी थोड़ी बहुत करती हूँ. अब कभी-कभार कोई दवाई लेनी पड़ती है, जैसे कभी कोई विटामिन वगैरह, लेकिन नियमित दवाई कोई नहीं ले रही.''
सुबह 8 बजे उठती हैं, फ़िल्में देखने से करती हैं परहेज़
अपनी दिनचर्या के बारे में वो बताती हैं, ''सुबह उठ तो 8 बजे के क़रीब जाती हूँ, लेकिन सोना कई बातों पर निर्भर करता है, कभी मेहमान या कोई मिलने आ जाते हैं तो उनके साथ देर तक बातें चलती रहती हैं."
क्या वो अपनी फ़िल्मों को देखकर पुराने दिनों को याद करती हैं, इस पर उन्होंने कहा, "अपनी फ़िल्में बार-बार क्या देखनी, टीवी पर कभी अचानक किसी की कोई अच्छी फ़िल्म देखने को मिल जाए तो वो थोड़ी-बहुत देख लेती हूँ. वैसे मैं टीवी पर फ़िल्म या सीरियल कुछ देखती नहीं, हां, समाचार ज़रूर देख लेती हूँ.''

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75 साल से हैं अभिनय को समर्पित
लाहौर में 25 फ़रवरी, 1927 को जन्मीं कामिनी कौशल को फ़िल्मों में आए 75 बरस से भी ज़्यादा हो गए हैं.
दिलचस्प बात यह है कि वो 90 की उम्र में भी अभिनय कर रही थीं. 2019 में प्रदर्शित एक अच्छी और सफल फिल्म 'कबीर सिंह' में भी कामिनी शाहिद कपूर की दादी बनी थीं.
'कबीर सिंह' के लिए कामिनी कौशल को 2020 में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का स्क्रीन अवार्ड तो मिला ही, साथ ही, फ़िल्मफ़ेयर ने भी उन्हें नामांकित किया.
इससे पहले 2013 में रोहित शेट्टी की चर्चित फिल्म 'चेन्नई एक्सप्रेस' में भी कामिनी कौशल ने शाहरुख़ ख़ान की दादी का रोल निभाया था. उससे कुछ और बरस पहले फ़िल्म 'लागा चुनरी में दाग़' में भी वो अभिषेक बच्चन की दादी बनी थीं.
कामिनी कौशल 1946 से हाल तक फ़िल्मों में काम करती रही हैं. पहले तो किसी कलाकार का 75 बरसों का अभिनय सफ़र ही अपने आप में एक कीर्तिमान है. दूसरा 90 की उम्र के बाद भी, पूरे उत्साह और ऊर्जा से भरा उनका शानदार अभिनय, उनके अतीत को सलीक़े से याद करने को विवश करता है.

पहली फ़िल्म ने ही कान फ़िल्म समारोह में मचाई धूम
1945 में जब चेतन आनंद गोर्की के उपन्यास 'द लोअर डेप्थस' पर 'नीचा नगर' बनाने की योजना बना रहे थे, तभी उनकी नज़र गवर्मेंट कॉलेज, लाहौर में इंग्लिश ऑनर्स कर रहीं उमा कश्यप पर पड़ी, जो कॉलेज में रेडियो नाटक कर रही थीं.
कामिनी का फ़िल्मों में अभिनय करने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन चेतन ने उमा और उनके भाई केदार से बात करने के बाद उन्हें अपनी फ़िल्म के लिए मना लिया. फ़िल्म में चेतन की पत्नी उमा आनंद भी काम कर रही थीं. एक फ़िल्म में दो उमा न हों, इसलिए चेतन ने उमा कश्यप का नाम बदलकर कामिनी कौशल कर दिया.
'नीचा नगर' का पहला प्रदर्शन 29 सितंबर, 1946 को फ्रांस के कान अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह में हुआ. वहां इस फ़िल्म को 'गोल्डन पाम' पुरस्कार मिला. इसी के साथ जहां 'नीचा नगर' विदेश में अपना परचम लहराने वाली पहली भारतीय फ़िल्म बन गई.
देखते देखते आने वाले कुछ बरसों में ही वो देश के उस दौर के शिखर के नायक अशोक कुमार, राज कपूर, दिलीप कुमार और देव आनंद की भी नायिका बन गईं.
कामिनी कौशल तब तो यकायक लोकप्रियता के शिखर पर पहुँच गईं, जब 1956 में उन्हें फ़िल्म 'बिराज बहू' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिला.

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