मेरा नाम ही स्वेटरमैन पड़ गया था: ऋषि कपूर

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- Author, सुप्रिया सोगले
- पदनाम, बीबीसी डॉट कॉम के लिए, मुंबई से
रुपहले पर्दे पर अपने अभिनय और ट्विटर पर अपनी सोच साझा करने के लिए मशहूर अभिनेता ऋषि कपूर आज के नौजवान अभिनेताओं को ज़्यादा पसंद नहीं करते.
वे कहते हैं कि ज़्यादातर अभिनेता एक्टिंग के अलावा बाक़ी सब कुछ सीखना चाहते हैं.
बीबीसी से बात करते हुए ऋषि कपूर ने कहा, "बॉडी बिल्डिंग का अभिनय से क्या लेना-देना? घुड़सवारी और तलवारबाज़ी का अभिनय से क्या संबंध?"
वे हिदायत देते हैं, "शरीर की मांसपेशियां बनाने से पहले चेहरे की मांसपेशियां तो बनाओ. अभिनय सीखो. आज अभिनेता सबसे पहले अपना शर्ट उतारते हैं जिसका कोई तुक ही नहीं है."

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'मैं पेड़ों के आस-पास ही नाचता रहा'
ऋषि कपूर का कहना है कि आज के दौर में 'सिर्फ़ वही अभिनेता काम कर पाएंगे जो अच्छा अभिनय करते हैं. जो औसत दर्जे के कलाकार हैं वो ग़ुम हो जाएंगे फिर चाहे वो किसी और काम में कितने ही माहिर क्यों ना हो. हालांकि उन्होंने अफ़सोस जताया की जब कोई एक अभिनेता कोई एक काम करने में सफल हो जाता है तो इंडस्ट्री में इसका ट्रेंड-सा बन जाता है.'
ऋषि कपूर मानते हैं कि 'बतौर अभिनेता उनकी सराहना नहीं हुई और इसका ज़िम्मेदार वो अपने आप को मानते है. वो कहते हैं कि दर्शकों और समीक्षकों के सामने उन्होंने कोई नई चीज़ नहीं की.'
वो कहते हैं, "मैं हीरोइन के साथ रोमांस कर रहा था, पेड़ों के इर्द-गिर्द नाच रहा था. ऊटी, कश्मीर और स्विट्ज़रलैंड में गाना गा रहा था. पूरी दुनिया में मेरा नाम स्वेटरमैन पड़ गया था. मुझे कभी भी अलग किरदार नहीं दिए गए जबकि मेरे समकालीन अभिनेताओं को अलग-अलग तरह के किरदार निभाने के लिए मिल रहे थे."

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'मेरा स्टाइल नहीं था क्योंकि मैं नेचुरल एक्टर था'
ऋषि कपूर कहते हैं, "मुझे इस बात की शिकायत नहीं है. मेरा 25 साल का लंबा रोमांटिक करियर रहा. मैं भले ही सबसे बड़ा स्टार नहीं था लेकिन मैं पांच बड़े अभिनेताओं में से एक था. उस दौर में 25 साल तक ऐसा करियर किसी अभिनेता का नहीं था. देव आनंद साहब, जितेन्द्र जी, काकाजी (राजेश ख़न्ना) और यहाँ तक कि बच्चन साहब ने भी तीन साल का ब्रेक लिया था. आज फ़िल्म इंडस्ट्री में तीनों ख़ानों (आमिर ख़ान, सलमान ख़ान और शाहरुख ख़ान) ने 25 साल तक काम किया है क्योंकि आज ऐसा करना आसान है."
ऋषि कपूर ये भी मानते है कि उनके अभिनय में कोई स्टाइल नहीं था लेकिन वो एक स्वाभाविक अभिनेता है. वो कहते हैं, "जिन अभिनेताओं का स्टाइल था शायद वो बतौर कलाकार असुरक्षित थे इसलिए उन्हें स्टाइल का सहारा लेना पड़ता था".
करियर के बेहतरीन पड़ाव पर खड़े ऋषि कपूर को ख़ुशी है कि उन्हें अब अलग-अलग तरह के क़िरदार निभाने का मौक़ा मिल रहा है जो उन्हें अपने पहले के दिनों में नहीं मिला.
वो कहते हैं कि उस दौर में हर अभिनेता की तीन-चार फिल्में या तो मिलने-बिछड़ने से जुड़ी होती थीं या फिर अमीर-गरीब की प्रेम कहानी होती थी.

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ऋषिकेश-गुलज़ार के साथ काम करने का म़ौका नहीं मिला
ऋषि कपूर के मुताबिक़ उस दौर में ऋषिकेश मुख़र्जी और गुलज़ार अलग फ़िल्में बना रहे थे लेकिन उन्हें उनके साथ काम करने का मौक़ा नहीं मिला क्योंकि उसमें दूसरे कलाकार होते थे.
ऋषि कपूर मानते हैं कि आज के दौर में मल्टीप्लेक्स खुल गए हैं और अच्छा सिनेमा देखने की चाह रखने वाले एक संवेदनशील दर्शक के लिए फ़िल्म देखने की जगह बनी है.
वो कहते हैं, "यही वजह है कि मेरे जैसे अभिनेताओं को अलग-अलग क़िरदार करने का मौक़ा मिल रहा है, वरना चालीस-पचास की उम्र में अभिनेताओं को फ़िल्मों से सन्यास लेना पड़ता था."

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'लोग मुझे और अमिताभ को साथ देखना चाहते हैं'
ऋषि कपूर ने तय किया है कि वो हीरो-हीरोइन के बाप का क़िरदार कतई नहीं करेंगे.
वे कहते हैं कि वो फ़िलहाल सिर्फ़ अलग क़िरदार करना चाहते हैं और अपने हर क़िरदार में अलग दिखना चाहते है. वे मानते हैं कि आज भी दर्शक उन्हें और अमिताभ बच्चन को एक साथ बड़े पर्दे पर देखना पसंद करते हैं.
27 साल के अंतराल के बाद अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर एक साथ फिर से "102 नॉट आउट" में बाप-बेटे के क़िरदार में नज़र आएंगे.
इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन की उम्र 102 साल है और वो 75 साल के ऋषि कपूर के पिता बने हैं. उमेश शुक्ला की बनाई यह फ़िल्म 4 मई को रिलीज़ होगी.
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