जब शशि कपूर के आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, शत्रुघ्न सिन्हा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
शशि कपूर हमारे वरिष्ठ नहीं बल्कि हमारे और पूरी फ़िल्म इंडस्ट्री के बहुत अच्छे दोस्त रहे.
सबसे बड़ी बात ये है कि अपनी मुस्कान, अपनी एक्टिंग और व्यवहार के मामले में जादूगर शशि कपूर, राज कपूर के खानदान से आते थे, जो मेरे प्रेरणा स्रोत रहे हैं.
मैं राजकपूर का दिवाना रहा हूं. उनके छोटे भाई थे शशि कपूर. 'क्रांति', 'काला पत्थर', 'अमर शक्ति' समेत हमने कई फ़िल्में साथ की थीं.
हम लोग जब साथ काम करते थे तो उस दरम्यान हर लम्हा एक ज़िंदादिल पल होता था.
वो इतने हंसमुख इंसान और इतने बढ़िया इंसान थे जिन्होंने अपनी ज़िंदगी के थियेटर से लेकर फ़िल्म मेकर तक उन्होंने आर्ट सिनेमा, न्यू सिनेमा और समानांतर सिनेमा को बहुत प्रभावित किया और बढ़ावा दिया.
कहा जाता है कि बाद के दौर में शशि कपूर का थियेटर की ओर रुझान बढ़ा था.
लेकिन असल में उन्होंने शुरुआत ही थियेटर से की थी और यहीं से उनका फ़िल्मों में पदार्पण हुआ था.

इमेज स्रोत, Getty Images
थियेटर से फ़िल्म निर्माता तक का सफ़र
थियेटर के दौरान ही उनकी मुलाक़ात जेनिफ़र से हुई थी. शशि कपूर ने थियेटर के दौर ने उन्होंने बहुत कुछ सीखा और मजबूती हासिल की.
इसके बाद वो फ़िल्मों में आए और जब आए तो कामयाबी की बुलंदियों पर पहुंचे, बहुत मशहूर और लोकप्रिय स्टार बने.
इसके बावजूद उन लोगों के लिए जोख़िम उठाने या उनकी हौसला अफ़ज़ाई करने की वो सदा कोशिश करते थे, जो अच्छे सिनेमा में यक़ीन रखते थे और इसके लिए फ़िक़्रमंद थे.
'36 चौरंगी लेन' जैसी कई फ़िल्में उन्होंने बनाईं भी. श्याम बेनेगल या ऐसे ही कुछ प्रतिष्ठित फ़िल्मकारों की उन्होंने हमेशा हौसला अफ़ज़ाई की.
वो बहुत बेजोड़ व्यक्तित्व के मालिक रहे. उनका कारनामा, उनका अंदाज़ेबयां, उनके देखने, मुस्कुराने और बात करने की शैली, सही मायने में वो एक जादुई व्यक्ति के मालिक थे.
उनके चाहने वाले उनको हमेशा याद करते रहेंगे और प्यार करते रहेंगे.
शशि कपूर जहां और जिन कलाकारों के साथ काम करते थे, अपनी अमिट छाप छोड़ देते थे. हमारे बीच में उनका न रहना हमारे लिए बहुत सदमा जैसा है.

इमेज स्रोत, Getty Images
जब शशि कपूर की आंखों से आंसू टपकने लगे
उनसे पिछली मुलाक़ात की याद अभी ताज़ा है. कपूर खानदान के एक अनोखे और विद्रोही स्टार शम्मी कपूर की अंत्येष्टि में शशि कपूर भी पहुंचे थे.
वो अपने व्हील चेयर पर थे और शायद वो उस समय बोल नहीं पा रहे थे या बोलने की शक्ति नहीं थी उनमें.
मैं और अमिताभ बच्चन दोनों उनके पास गए तो, शशि कपूर ने हमारी तरफ देखा और हम दोनों का हाथ पकड़ लिया. उनकी आंखों से आंसू टपकने लगे.
वो हमसे कुछ कहना चाहते थे लेकिन शक्ति नहीं थी, या शायद उनका ये अलविदा कहने का अंदाज़ रहा हो.

इमेज स्रोत, Getty Images
पत्नी के निधन ने अकेला कर दिया था
मैंने सुना है कि जबसे उनकी पत्नी जेनिफ़र इस दुनिया से विदा हुईं, तबसे वो खुद को बहुत अकेला महसूस करने लगे थे.
हालांकि उनके बच्चे बहुत प्यारे हैं और उनकी लोगों ने बहुत क़द्र की और ख्याल रखा लेकिन उन्होंने खुद का ख्याल नहीं रखा, ख़ासकर जेनिफ़र के चले जाने के बाद.
शशि कपूर का इस दुनिया से जाना पूरी फ़िल्म इंडस्ट्री के लिए कभी न भर पाने वाली क्षति है.
(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित.)












