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भारत की विकास दर में तेज़ गिरावट | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की आर्थिक विकास दर में तेज़ गिरावट दर्ज की गई है. चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही यानी अक्तूबर से दिसंबर के बीच जीडीपी सिर्फ़ 5.3 फ़ीसदी की दर से बढ़ी. शुक्रवार को ये आँकड़ा जारी होने के बाद भारतीय शेयर बाज़ारों में भी गिरावट दर्ज की गई है. जबकि इससे पिछले वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी 8.9 फ़ीसदी की दर से बढ़ी थी. वर्ष 2003 के बाद किसी तिमाही में आई यह सबसे बड़ी गिरावट है. विश्लेषकों का कहना है कि अमरीकी सबप्राइम संकट से शुरु वैश्विक मंदी का भारत पर असर ताज़ा आँकड़ों से स्पष्ट दिखाई देता है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर 7.9 फ़ीसदी रही, उसके बाद जुलाई से सितंबर के बीच दूसरी तिमाही में यह गिर कर 7.6 फ़ीसदी रह गई थी. लक्ष्य नहीं आसान भारत सरकार और रिज़र्व बैंक ये दावा करते रहे हैं कि वैश्विक मंदी के बावजूद इस वर्ष विकास दर सात फ़ीसदी रहेगी लेकिन ताजा आँकड़ों के मुताबिक इस लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं होगा. वो भी तब जब अभी चौथी तिमाही के आँकड़े आने बाकी हैं. ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक कृषि विकास दर में 2.2 फ़ीसदी की गिरावट आई है जबकि वैश्विक मंदी का असर इस क्षेत्र पर न के बराबर है. मैनुफैक्चरिंग में 0.2 फ़ीसदी की मामूली गिरावट आई है जबकि निर्माण क्षेत्र 6.7 फ़ीसदी की दर से बढ़ा. हालाँकि खनन, संचार, बैंकिंग, बीमा और सरकारी सेवा क्षेत्रों ने संतोषजनक प्रदर्शन किया है. कार्यवाहक वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपने बजट भाषण में आगाह किया था कि वर्ष 2009 में अर्थव्यवस्था की गति और धीमी पड़ सकती है. |
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