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शनिवार, 08 नवंबर, 2008 को 08:28 GMT तक के समाचार
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'विकास दर सात फ़ीसदी रहने के आसार'
कार उद्योग
मंदी का सर्वाधिक असर निर्यात आधारित उद्योगों पर पड़ेगा
भारत में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन सुरेश तेंदुलकर का कहना है कि मौजूदा वित्त वर्ष में विकास दर घट कर लगभग सात फ़ीसदी हो सकती है.

आर्थिक सलाहकार परिषद ने इसी वर्ष जून में आर्थिक विकास दर (जीडीपी) 7.7 फ़ीसदी रहने की संभावना जताई थी.

नई दिल्ली में शनिवार को योजना आयोग की एक बैठक के बाद सुरेश तेंदुलकर ने कहा, "हम जनवरी में फिर अपने लक्ष्यों की समीक्षा करेंगे. लेकिन मुझे लगता है कि जीडीपी दर सात फ़ीसदी के आस-पास रहेगी."

उनका कहना था, "सात फ़ीसदी विकास दर से हमें चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है. हम तब भी दुनिया में सर्वाधिक विकास दर हासिल करने वाले देशों की सूची में दूसरे नंबर पर होंगे."

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी तिमाही समीक्षा में विकास दर साढ़े सात से आठ फ़ीसदी के बीच रहने की संभावना जताई है.

वर्ष 2007-08 में भारत का आर्थिक विकास दर नौ फ़ीसदी रही थी लेकिन इस वर्ष मध्य से वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण इसका कुछ असर भारत पर भी पड़ा है.

सितंबर-अक्तूबर माह के दौरान औद्योगिक उत्पादन सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुक़ाबले महज एक से दो फ़ीसदी के बीच रिकॉर्ड किया गया.

माना जा रहा है कि वैश्विक मंदी का सर्वाधिक असर निर्यात आधारित उद्योगों पर पड़ेगा. इससे सूचना प्रौद्योगिकी और आउटसोर्सिंग कंपनियों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

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