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रैनबैक्सी पर अब दाइची का अधिकार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जापान की एक बड़ी दवा निर्माता कंपनी, दाइची ने भारत की अग्रणी दवा कंपनी रैनबैक्सी को ख़रीद लिया है. किसी विदेशी कंपनी का भारतीय कंपनियों में एक बड़ा हिस्सा ख़रीदकर अपना प्रभाव क़ायम करने का यह अबतक का दूसरा बड़ा मामला बताया जा रहा है. दाइची ने चार अरब अमरीकी डॉलर की रक़म लगाकर रैनबैक्सी के 60 प्रतिशत शेयर पर अपना अधिकार बना लिया है. इससे पहले पिछले वर्ष वोडाफ़ोन ने भारतीय कंपनी हच को 11 अरब डॉलर में खरीद लिया था. इस बात की घोषणा इस वर्ष की शुरुआत में ही हो गई थी पर कई औपचारिकताएं बाकी थीं. दाइची ने कहा है कि उसने रैनबैक्सी के अधिग्रहण का कार्यक्रम पूरा कर लिया है. ग़ौरतलब है कि सितंबर में अमरीका ने रैनबैक्सी की 30 दवाओं के आयात पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि वे दवा तैयार करने के मानकों पर खरी नहीं उतरती हैं. इससे रैन्बैक्सी को बड़ा झटका लगा था और रैन्बैक्सी के शेयर इस प्रतिबंध के बाद तेज़ी से नीचे आए थे. अब दाइची ने रैनबैक्सी के 60 प्रतिशत शेयरों का मालिकाना हासिल कर लिया है और रैनबैक्सी हाल के दिनों में विदेशी कंपनियों के हाथ जाने वाली दूसरी भारतीय कंपनी बन गई है. रैनबैक्सी को खरीदने का सीधा लाभ जापानी कंपनी को मिलेगा. वह रैनबैक्सी द्वारा तैयार जेनेरिक दवाओं के देशी और विदेशी बाज़ार पर काबिज हो सकेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें आयुर्वेदिक दवाएँ संदेह के घेरे में27 अगस्त, 2008 | विज्ञान डिप्रैशन की दवाई का असर कितना!26 फ़रवरी, 2008 | विज्ञान रैनबैक्सी ने रोमानियाई कंपनी को ख़रीदा29 मार्च, 2006 | कारोबार रैनबैक्सी की 'एड्स दवा' अमरीका पहुँची13 जनवरी, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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