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रैनबैक्सी ने रोमानियाई कंपनी को ख़रीदा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी रैनबैक्सी ने 32 करोड़ डॉलर संपत्ति की रोमानिया की एक दवा कंपनी टेरापिया को ख़रीद लिया है. दोनों ही कंपनियाँ दवाओं के मूल रसायन या जेनेरिक ड्रग के निर्माण के काम में विशेषज्ञता रखती हैं. ये समझौता इसलिए किया गया ताकि यूरोप में इन कंपनियों का और विस्तार हो सके. रैनबैक्सी के प्रमुख मालविंदर सिंह ने कहा,"ये सौदा बहुत ही आकर्षक है और इससे हम दुनिया की पाँच शीर्ष जेनेरिक कंपनियों में शामिल होने की राह पर और आगे बढ़ गए हैं". रैनबैक्सी ने पिछले वर्ष एक अरब 20 करोड़ डॉलर का कारोबार किया था. वहीं टेरापिया यूरोप के 15 देशों में अपनी दवाएँ बेचती है. सौदे के बाद अब टेरापिया के 97.5 प्रतिशत शेयर रैनबैक्सी को मिल जाएँगे. रैनबैक्सी का कहना है कि मध्य और पूर्वी यूरोप में रोमानिया में दवा बाज़ार काफ़ी तेज़ी से बढ़ रहा है और ये 34 प्रतिशत का सालाना दर से बढ़ रहा है. रैनबैक्सी के कर्मचारी दुनिया के 46 देशों में हैं और उसकी दवाएँ 125 देशों में बेची जाती हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें रैनबैक्सी की 'एड्स दवा' अमरीका पहुँची13 जनवरी, 2005 | विज्ञान दो दवा कंपनियों में समझौता 23 अक्तूबर, 2003 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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