|
'20 हज़ार भारतीयों ने नौकरियाँ गँवाईं' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने कहा है कि वैश्विक आर्थिक मंदी की वजह से लगभग 20 हज़ार भारतीयों को विदेशों में नौकरी गँवानी पड़ी है और वे वापस लौट आए हैं. आप्रवासी भारतीयों के मामलों के मंत्री वायलार रवि का कहना है कि हालांकि नौकरी गँवाने के बाद लौटने वाले भारतीयों की ठीक-ठीक संख्या मालूम नहीं है लेकिन यह संख्या 16 हज़ार से 20 हज़ार के बीच है. राज्य सभा में प्रश्नकाल के दौरान उन्होंने कहा कि अब तक जो रिपोर्ट मिली है उससे यही संकेत मिल रहे हैं. एक पूरक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि विदेशों में भारतीय कर्मचारियों के पासपोर्ट नियोक्ताओं के पास रखे जाने की घटनाओं में 50 प्रतिशत की कमी आई है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह कमी किस समायवधि में आई है. वायलार रवि का कहना था कि यह बात भारत सरकार की जानकारी में है कि कई मामलों में नियोक्ता कर्मचारियों के पासपोर्ट अपने पास रख लेते हैं और फिर वीज़ा का नवीनीकरण नहीं करवाते इससे कर्मचारी अवैध आप्रवासी बन जाते हैं. उनका कहना था कि सरकार संबंधित सरकारों से इस विषय में चर्चा कर रही है. मंत्री ने कहा कि आप्रवासन क़ानून में आख़िरी बार संशोधन 1983 में किया गया था और अब इसमें संशोधन की आवश्यकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'वेतन कम करें लेकिन नौकरी न छीनें'20 फ़रवरी, 2009 | कारोबार नौकरी जाना यानि सपनों का उजड़ जाना08 फ़रवरी, 2009 | कारोबार 'अब और आर्थिक पैकेज नहीं मिलेगा'21 जनवरी, 2009 | कारोबार सोनी कंपनी में हज़ारों नौकरियाँ जाएँगी09 दिसंबर, 2008 | कारोबार प्रवासी भारतीयों के लिए सुविधा केंद्र08 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस 'बेवफ़ा परदेसियों' की पत्नियों को मदद23 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||