 | | | आईटी क्षेत्र के लोगों पर बुरी मार पड़ी है |
भारत सरकार ने कंपनियों से कहा है कि वे लोगों को नौकरियों से हटाने से बचें, अगर हालात बहुत बुरे हों तो वेतन में कटौती के उपाय पर विचार करें. सरकार ने शुक्रवार को संसद में जानकारी दी है कि पिछले चार महीनों में पाँच लाख लोग आर्थिक मंदी की वजह से अपनी नौकरियाँ गँवा चुके हैं, इनमें से अधिकतर लोग ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम कर रहे थे. स्वास्थ्य कारणों से छुट्टी पर चल रहे मनमोहन सिंह की गैर-मौजूदगी में विदेश मंत्रालय के साथ ही वित्त मंत्रालय का भी काम देख रहे प्रणब मुखर्जी ने कहा, "हर हाल में नौकरियों को बचाया जाना चाहिए, अलबत्ता वेतन में कमी का विकल्प अपनाया जा सकता है."  |  हर हाल में नौकरियों को बचाया जाना चाहिए, अलबत्ता वेतन में कमी का विकल्प अपनाया जा सकता है  प्रणब मुखर्जी |
प्रणब मुखर्जी ने ये विचार एक सेमिनार में व्यक्त किए, सेमिनार के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार आधारभूत ढाँचे में अधिक से अधिक पूंजी निवेश कर रही है ताकि रोज़गार के अवसर उपलब्ध हों. जब उनसे पूछा गया कि अमरीकी कंपनियों में विदेशी लोगों को नौकरी न देने का जो सरकार का निर्देश है उसका कितना असर पड़ रहा है, इसके जवाब में उन्होंने कहा, "दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में संरक्षणवाद के चिंतित करने वाले लक्षण दिख रहे हैं, इस मामले को हम अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाएँगे." उन्होंने कहा कि सरकार हालत को लेकर बहुत चिंतित है, उन्होंने स्वीकार किया कि पाँच लाख नौकरियों का जाना भयावह स्थिति की पूरी तस्वीर पेश नहीं करता, स्थिति इससे कहीं अधिक गंभीर है. संसद में चर्चा संसद में केंद्रीय श्रम मंत्री ऑस्कर फर्नांडिस ने बताया कि राज्यों के श्रम मंत्रियों की एक आपात समिति गठित की गई है जो स्थिति पर नज़र रखेगी. कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि निजी क्षेत्र की कंपनियों को चेतावनी दी जानी चाहिए कि वे श्रम का़नूनों का उल्लंघन न करें वरना सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी. उन्होंने ये भी माँग की कि निजी कंपनियाँ अगर कम ब्याज दर पर कर्ज़ और अन्य सुविधाएँ चाहती हैं तो उन्हें रोज़गार के मामले में सरकारी निर्देशों का पालन करना होगा. |