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'पैकेज दें तो एक डॉलर पर काम करेंगे' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका की तीन बड़ी कार कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने पेशकश की है कि यदि अमरीकी कांग्रेस मंदी के दौर से गुज़र रहे कार उद्योग के लिए वित्तीय मदद का पाकेज मंज़ूर करती है तो वे एक डॉलर के वार्षिक वेतन पर काम करने के लिए तैयार हैं. फ़ोर्ड, क्राइसलर और जेनरल मोटर्स ने अमरीकी कांग्रेस के समक्ष 25 अरब डॉलर के सरकारी कर्ज़ की पेशकश की है. जेनरल मोटर्स ने कहा है कि यदि कंपनी को बचाना है तो उसे अगले वर्ष मार्च तक 12 अरब डॉलर की ज़रूरत है. कंपनी ने नौ कारखाने बंद करने, अपने ब्रांड चार तक सीमित करने और तीस हज़ार नौकरियाँ कम करने की घोषणा की है. फ़ोर्ड ने घोषणा की है कि वर्ष 2009 में प्रबंधन में कार्यरत लोगों को कोई बोनस नहीं दिया जाएगा और कंपनी को पटरी पर लाने के लिए कंपनी के जेट विमानों को बेच दिया जाएगा. ब्रिकी ख़ासी घटी आमतौर पर फ़ोर्ड, क्राइसलर और जेनरल मोटर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों का वेतन करोंडों रुपए प्रति माह होता है. लेकिन वित्तीय संकट, कंपनियों के बंद हो जाने का ख़तरा और वरिष्ठ अधिकारियों के बड़े-बड़े बोनस से आम लोगों में संभावित नाराज़गी के कारण इन कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने ये घोषणा की है. वर्ष 1903 में शुरू हुई फ़ोर्ड कंपनी ने कहा है कि लोग इसे लोकप्रियता हासिल करने की चाल न समझे. कंपनी के अनुसार, "हमने अपने हर कर्मचारी का बोनस ख़त्म कर दिया है. यह एक बड़ा संकेते है. हम ये बताना चाहते हैं कि इस पैसे से हम अपनी भविष्य की योजनाओं को बचाना चाहते हैं." फ़ोर्ड को पिछले वर्ष 12.7 अरब डॉलर का नुक़सान हुआ है. कंपनी के 103 साल के इतिहास में यह सबसे बड़ा नुक़सान है. नवंबर में फ़ोर्ड की बिक्री में पिछले साल इस महीने के मुकाबले में 31 प्रतिशत की कमी आई है जबकि जेनरल मोटर्स की बिक्री 41 प्रतिशत और क्राइसलर की बिक्री 47 प्रतिशत घटी है. फ़ोर्ड ने इसी साल मार्च में जैगुअर और लैंड रोवर के ब्रैंड भारत की टाटा मोटर्स को बेच दिए थे. उधर वर्ष 1908 में, यानी 100 साल पहले बनी जेनरल मोटर्स अमरीका की सबसे जानी-मानी कंपनियों में से एक है लेकिन उसका भी लगभग ऐसा ही हाल है. अमरीकी सीनेट के कुछ सदस्यों और जानकारों का कहना है कि राजनीतिक नेता इन तीन कंपनियों को बचाने से पहले जानना चाहते हैं कि क्या इन्हें वित्तीय मदद देने से ये कंपनियाँ बचाई जा सकती हैं. उनका मानना है कि यदि 'इन विशालकाय कंपनियों में अगर इतनी ताकत बची ही नहीं तो इन्हें कर्ज़ देने का फ़ायदा है.' फ़ोर्ड पिछल सकती है कार उद्योग के जानकार मानते हैं कि इस साल जापानी कंपनी टोयोटा अमरीकी बाज़ार में फ़ोर्ड को पीछे छोड़ देगी. फ़ोर्ड अमरीका की दूसरी बड़ी और दुनिया की तीसरी बड़ी कार बनाने वाली कंपनी है. वर्ष 2006 से पहले फ़ोर्ड को सबसे बड़ा नुक़सान वर्ष 1992 में हुआ था, जब कंपनी को एक साल में 7.39 अरब डॉलर की चपत लगी थी. लेकिन अब रिकॉर्ड घाटे के बावजूद फ़ोर्ड का कहना है कि वह वर्ष 2009 तक लाभ में आ जाएगी. पिछले साल फ़ायदे के लिए फ़ोर्ड ने ट्रक, छोटे वाहन और स्पोर्ट्स गाड़ियों में ज़्यादा पैसा लगाया था लेकिन तेल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी के कारण उसे इसका लाभ नहीं मिल सका. | इससे जुड़ी ख़बरें ड्राइवर के लिए एमएस-फोर्ड का तोहफ़ा08 जनवरी, 2007 | कारोबार नए साल में सस्ता होगा कार बीमा07 दिसंबर, 2006 | कारोबार फ़ोर्ड में 75 हज़ार नौकरियाँ ख़त्म होंगी15 सितंबर, 2006 | कारोबार चीन में ज़्यादा कार बनाएगी टोयोटा31 जुलाई, 2006 | कारोबार भारत में कारों की बिक्री बढ़ी03 अप्रैल, 2006 | कारोबार फ़ोर्ड 30 हज़ार नौकरियों की कटौती करेगा23 जनवरी, 2006 | कारोबार फ़ोर्ड में नौकरियों पर गाज गिरी02 अक्तूबर, 2003 को | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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