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नए साल में सस्ता होगा कार बीमा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में मोटर बीमा पर अगले साल से मूल्य नियंत्रण हट रहा है, लिहाजा निजी कार और दोपहिया वाहनों के लिए बीमा सस्ता हो सकता है. बीमा क्षेत्र की नियामक संस्था आईआरडीए, मोटर इंश्योरेंस पर एक जनवरी 2007 से मूल्य नियंत्रण हटा रही है. इस क़दम के कई दूरगामी परिणाम हो सकते हैं. वैसे निजी कार मालिकों और दोपहिया मालिकों के लिए ये ख़ुशख़बरी हो सकती है. संभावना है कि निजी कार और दोपहिया वाहनों की बीमा प्रीमियम दरें 15 से बीस फ़ीसदी कम हो सकती हैं. सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी नेशनल इंश्योरेंस के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक वी रामासामी ने बीबीसी को बताया कि उनकी कंपनी इस वर्ग के ग्राहकों के लिए 15 प्रतिशत की छूट दे सकती है. घाटे की दर वी रामासामी ने कहा, “प्राइवेट कार और दोपहिया वाहनों पर प्रीमियम दरों में 15 से बीस फ़ीसदी की कटौती हो सकती है. ऐसा इसलिए है कि इस श्रेणी में लॉस रेशियो यानी घाटे की दर क़रीब 40 फ़ीसदी के आस-पास ही है.” लॉस रेशियो का अर्थ एक साल में जमा कराए गए कुल प्रीमियम और दावे की राशि में अंतर से है. मसलन अग़र आपने साल भर में दस हज़ार रुपए प्रीमियम के रुप में जमा कराए और बदले में दावा सिर्फ़ चार हज़ार रुपये का ही किया तो बीमा कंपनी के लिए लॉस रेशियो बेहद फ़ाएदेमंद है. रामास्वामी भी यही कह रहे हैं कि दावों की संख्या कम होने की वजह से इस श्रेणी में प्रीमियम की दरें कम होने की संभावना है. लेकिन व्यावसायिक वाहनों के लिए ये ख़बर अच्छी नहीं है. रामास्वामी कहते हैं, ''व्यावसायिक वाहनों में दावे की राशि प्रीमियम से ज़्यादा है, इसलिए इस श्रेणी में बीमा महंगा हो सकता है.'' व्यावसायिक वाहनों के मालिकों के लिए राहत की बात ये है कि मौजूदा बीमाओं पर इन परिवर्तनों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें जीई ने भारत में अपनी हिस्सेदारी बेची08 नवंबर, 2004 | कारोबार अर्थव्यवस्था में कहाँ खड़ा है कृषि क्षेत्र?24 अप्रैल, 2006 | कारोबार अवीवा 1000 नौकरियाँ भारत ले जाएगी14 सितंबर, 2006 | कारोबार ब्रिटेन का रोज़गार भारत में30 सितंबर, 2002 | कारोबार किसानों के लिए उम्मीद की किरण?19 जून, 2004 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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