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पेट्रोल पाँच, डीज़ल तीन रुपए महंगा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी का फ़ैसला किया है. बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में फ़ैसला लिया है कि पेट्रोल के दामों में पाँच रुपए और डीज़ल के दामों में तीन रुपए प्रतिलीटर की वृद्धि करने का फ़ैसला लिया गया है. इसके अलावा घरेलू रसोई गैस की क़ीमतों में 50 रुपए प्रति सिलेंडर की बढ़ोत्तरी करने का निर्णय लिया है. बढ़ोत्तरी की घोषणा करते हुए पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने बताया कि आमलोगों को ध्यान में रखते हुए कैरोसिन या मिट्टीतेल की क़ीमतों में कोई बढ़ोत्तरी न करने का फ़ैसला किया गया है. उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में लगातार बढ़ रही तेल की क़ीमतों के कारण सरकारी तेल कंपनियों का घाटा बढ़ता जा रहा था और वर्ष 2007-08 में यह घाटा 245 हज़ार करोड़ तक जा पहुँचा है. पेट्रोलियम मंत्री का कहना था कि इससे अधिक बोझ सरकार और तेल कंपनियाँ वहन नहीं कर पा रहीं थीं और इसके चलते क़ीमतें बढ़ानी पड़ी हैं. उनका कहना था कि सरकार ने क़ीमतों में न्यूनतम बढ़ोत्तरी की है. दूसरी तरफ़ मुंबई शेयर बाज़ार का संवेदी सूचकांक 400 अंक नीचे गिर गया है. तेल क़ीमतों में वृद्धि के बाद इसके नीचे आने की आशंका जताई जा रही थी. सरकारी सहायता मुरली देवड़ा ने पत्रकारों को बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतें 129 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुँची है.
उन्होंने कहा कि इस बढ़ी हुई क़ीमत के चलते पेट्रोल-डीज़ल और रसोई गैस की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी ज़रूरी हो गई थी. पेट्रोलियम मंत्री का कहना था कि पेट्रोल की क़ीमतों में 21.43 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की ज़रूरत थी लेकिन सरकार ने पाँच रुपए प्रति लीटर की ही बढ़ोत्तरी की है. उनका कहना था कि डीज़ल के दामों में 31.58 रुपए प्रति लीटर बढ़ोत्तरी की आवश्यकता थी लेकिन बढ़ोत्तरी तीन रुपए प्रति लीटर की गई है. घरेलू रसोई गैस में 353 रुपए प्रति सिलेंडर बढ़ोत्तरी की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ोत्तरी 50 रुपए प्रति सिलेंडर ही की गई है. पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों के लागत मूल्य और बाज़ार मूल्य में जो अंतर है उसकी भरपाई सरकारी सहायता से की जाती रहेगी. इसका बोझ सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियाँ मिलकर उठाएँगीं. टैक्स में कटौती तेल की बढ़ती क़ीमतों और भारतीय बाज़ार में क़ीमत बढ़ाने की सीमित गुंजाइश के चलते तेल कंपनियों को जो घाटा होगा उसका बोझ कम करने के लिए तेल कंपनियों ने सरकार से टैक्स में कटौती का अनुरोध किया था.
पेट्रोलियम सचिव श्रीनिवासन ने पत्रकार वार्ता में बताया कि सरकार ने उनका अनुरोध मानते हुए टैक्स के ढाँचे में कटौती की घोषणा की है. उनके अनुसार कच्चे तेल की कस्टम ड्यूटी पाँच प्रतिशत से घटाकर शून्य करने का निर्णय लिया गया है. पेट्रोल और डीज़ल में कस्टम ड्यूटी 7.5 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दी गई है. दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी 10 प्रतिशत से घटाकर पाँच प्रतिशत कर दी गई है. इसी तरह सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी एक रुपए प्रति लीटर की दर से कम करने का निर्णय लिया है. ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने सोमवार को कहा था कि सरकार कच्चे तेल के क़ीमतों में भारी बढ़ोत्तरी के असर से उपभोक्ताओं को पूरी तरह मुक्त रखने की स्थिति में नहीं है. |
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