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एशिया में मंदी से बड़ा ख़तरा महँगाईः एडीबी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एशियाई विकास बैंक के प्रमुख हारूहिको कुरोडा ने उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को सचेत किया है कि अमरीकी आर्थिक मंदी का असर उन पर भी पड़ेगा. लेकिन उनका मानना है कि एशियाई देशों के लिए अमरीकी मंदी के असर की चिंता से ज़्यादा बड़ा ख़तरा बढ़ती मुद्रास्फ़ीति है. कुरोडो का बयान ऐसे समय में आया है जब शनिवार को टोक्यो में औद्योगिक देशों के वित्तमंत्रियों के समूह जी-7 की बैठक होने वाली है. उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक में वैश्विक आर्थिक विकास में सहयोग के तरीक़ों और विश्वव्यापी कर्ज़ संकट को टालने पर विचार-विमर्श होगा. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पिछले सप्ताह ही वैश्विक आर्थिक विकास के अपने पूर्वानुमान में कटौती की घोषणा की थी. मुद्रा कोष ने पहले आर्थिक विकास की दर 4.4 फ़ीसदी रहने का अनुमान लगाया था जिसे घटाकर 4.1 फ़ीसदी कर दिया गया है. यह पिछले पाँच सालों की न्यूनतम विकास दर होगी. जी-7 की नज़र इस बात पर भी रहेगी अमरीका में ब्याज दरों में भारी कटौती और करों में छूट वाले विधेयक की मंज़ूरी को देखते हुए क्या दूसरे औद्योगिक देश भी इस तरह का कोई क़दम उठाते हैं. साझा प्रयास? लेकिन ब्रिटेन के वित्तमंत्री एलेस्टेयर डार्लिंग ने वैश्विक मंदी से निबटने में साझे प्रयासों की संभावनाओँ को हल्के से लिया है.
वे कहते हैं, "सबसे पहली बात कि सभी देशों की परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं." अमरीका में ब्याज दरों और सरकारी ख़र्चों में कटौती के संदर्भ में डार्लिंग का कहना है, "दूसरे देश की स्थिति वैसी नहीं हैं." जी-7 में अमरीका, जापान, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी और इटली शामिल हैं. ये सारे देश इस समय विकास दर में कमी का सामना कर रहे हैं. चीन, भारत, पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं ने पिछले कुछ सालों में उल्लेखनीय विकास दर हासिल की है. इनका विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़ा है. लेकिन वैश्विक ऋण संकट और गृह निर्माण क्षेत्र में मंदी ने विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को घुटने टेकने के लिए मज़बूर कर दिया है. ऐसे में अमरीकी मंदी का असर एशिया तक पहुँचने की चिंता बनी हुई है क्योंकि यह महाद्वीप अफने उत्पादों के निर्यात और विदेशी पूँजी जुटाने के लिए आम तौर पर अमरीका पर निर्भर है. एशियाई विकास बैंक के प्रमुख कुरोडा भी इन चिंताओं को सही ठहराते हैं. वे कहते हैं, "निवेश, व्यापार और दूसरे वित्तीय संबंधों के ज़रिए अमरीका में बड़ी मंदी का असर तय रूप से क्षेत्र के विकास पर पड़ेगा." | इससे जुड़ी ख़बरें 'अमरीकी अर्थव्यवस्था की स्थिति ख़राब'11 जनवरी, 2008 | कारोबार अमरीकाः ब्याज दर में कटौती नाकाम22 जनवरी, 2008 | कारोबार अमरीकी आर्थिक पैकेज को मंज़ूरी24 जनवरी, 2008 | कारोबार 'ब्याज दरों में बदलाव नहीं'29 जनवरी, 2008 | कारोबार अमरीका ने ब्याज दरों में और कटौती की30 जनवरी, 2008 | कारोबार अमरीका में बेरोज़गारों की संख्या बढ़ी02 फ़रवरी, 2008 | कारोबार शेयर बाज़ारों में फिर गिरावट06 फ़रवरी, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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