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मंगलवार, 29 जनवरी, 2008 को 09:20 GMT तक के समाचार
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'ब्याज दरों में बदलाव नहीं'

रिज़र्व बैंक
अमरीकी केंद्रीय बैंक के ब्याज दर घटाने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि शायद भारत में ब्याज दर घटाई जाएगी
भारतीय रिज़र्व बैंक ने मंगलवार को मौद्रिक और कर्ज़ नीति की तिमाही समीक्षा के बाद वित्त वर्ष 2007-08 में ब्याज दर में कोई परिवर्तन न करने का फ़ैसला किया है.

हालाँकि, अमरीका में अर्थव्यवस्था के सुस्त होने और वहाँ केंद्रीय बैंक की ओर से ब्याज दर को .75 प्रतिशत घटाने के बाद ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि भारत में ब्याज दर घटाई जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ है.

समाचार एजेंसियों के अनुसार रिज़र्व बैंक ने मुद्रास्फ़ीति यानी महँगाई की दर पाँच प्रतिशत तक नियंत्रित रखने और अर्थव्यवस्था की विकास दर का लक्ष्य 8.5 प्रतिशत रखने की घोषणा की है.

ब्याज दरों में कोई परिवर्तन न करते हुए वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने स्पष्ट कर दिया है कि वह महंगाई पर काबू पाने को अधिक तरजीह दे रहे हैं.

समाचार एजेंसियों के अनुसार महत्वपूर्ण यह है कि पिछले दो सालों में पहली बार रिज़र्व बैंक ने ब्याज दरों में कोई वृद्धि नहीं की है. इससे संकेत मिलता है कि मौद्रिक नीति दरों और वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखकर बनाई गई है.

रेपो दर

विभिन्न वाणिज्यिक बैंक अपना पैसा रिज़र्व बैंक के ख़ज़ाने में जमा करते हैं. इस पर रिज़र्व बैंक जिस दर से ब्याज देता है उसे रेपो दर कहते हैं.

जबकि रिवर्स रेपो दर ठीक इसके उलट होती है. जब रिज़र्व बैंक अन्य बैंकों को कम अवधि के लिए उधार देता है तो उस पर जिस दर से ब्याज मिलता है उसे रिवर्स रेपो दर कहते हैं.

इस बार रिज़र्व बैंक ने रेपो दर 7.75 पर ही और रिवर्स रेपो दर छह प्रतिशत पर ही रखा है यानी इन दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

रेपो दर बढ़ने से खुदरा कारोबार करने वाले बैंक रिज़र्व बैंक में ही पैसा रखना फ़ायदेमंद समझते हैं क्योंकि उन्हें अधिक ब्याज मिलता है.

दूसरी ओर रिवर्स रेपो दर बढ़ने से खुदरिया बैंकों को रिज़र्व बैंक से उधार लेने पर अधिक ब्याज का भुगतान करना पड़ता है.

जब बैंकों को रिज़र्व बैंक से उधार लेने में अधिक ब्याज देना पड़ता है तो वो इसकी भरपाई खुदरा ग्राहकों को दिए जाने वाले कर्ज़ या रिटेल लोन पर ब्याज़ दर बढ़ा कर करते हैं.

इसलिए ऐसी परिस्थिति में घर या कार खरीदने के लिए कर्ज़ लेने पर उपभोक्ताओं को बढ़े हुए ब्याज दर पर भुगतान करना पड़ सकता है. अब ऐसा होना की संभावना कम है क्योंकि ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

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