|
पेट्रोलियम की क़ीमतों पर विचार-विमर्श | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की लगातार बढ़ती क़ीमतों के बाद भारत में पेट्रोलियम उत्पादों के दाम बढ़ाने का दबाव बना हुआ है. पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस की क़ीमतें बढ़ाने के विकल्पों पर विचार करने के लिए यूपीए सरकार के कुछ बड़े नेताओं ने शुक्रवार को एक बैठक की. इस बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गाँधी, विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी, रक्षा मंत्री एके एंटनी और गृहमंत्री शिवराज पाटिल, वित्तमंत्री पी चिदंबरम और पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा उपस्थित थे. हालांकि यह नहीं पता चला है कि इस बैठक का क्या नतीजा निकला लेकिन समाचार एजेंसियों का कहना है कि शनिवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर कोई निर्णय लिया जा सकता है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इस बैठक में पेट्रोल के दाम तीन रुपए से लेकर सात रुपए तक, डीज़ल के दाम एक रुपए से लेकर चार रुपए तक और रसोई गैस के दाम 20 रुपए प्रति सिलेंडर बढ़ाने की संभावना पर विचार किया गया. एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से यह भी ख़बर दी है कि शनिवार को पेट्रोल के दाम तीन रुपए प्रति लीटर, डीज़ल के दाम दो रुपए प्रति लीटर और रसोई गैस के दाम 20 रुपए बढ़ाने की घोषणा किए जाने की संभावना है. उल्लेखनीय है कि पेट्रोलियम पदार्थों पर दी जाने वाली सरकारी छूट के चलते घाटा 225 हज़ार करोड़ तक जा पहुँचा है. भारतीय तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड को होने वाला घाटा भी लगातार बढ़ रहा है और ये कंपनियाँ सरकार पर दबाव बढ़ा रही हैं कि वह तेल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी करे. समाचार एजेंसी यूएनआई के अनुसार इन कंपनियों को सरकार की निर्धारित की हुई क़ीमतों पर पेट्रोलियम पदार्थ बेचने से प्रतिदिन 580 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है. सरकार ने इस साल फ़रवरी में पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों में थोड़ी बढ़ोत्तरी की थी लेकिन इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतों में भारी उछाल आया है. विरोध ख़बरें हैं कि सरकार में शामिल यूपीए के घटक दलों को पेट्रोलियम की क़ीमतें बढ़ाने के दबाव और क़ीमतें बढ़ाने की मजबूरी से अवगत करा दिया गया है.
लेकिन सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों में संभावित बढ़ोत्तरी का विरोध किया है. वामदलों ने कहा है कि यदि सरकार पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमत में बढ़ोत्तरी करती है तो इससे वे सभी प्रयास निष्प्रभावी हो जाएँगे जो महंगाई को रोकने के लिए अब तक उठाए गए हैं. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव ने कहा, "इस मसले पर सरकार या सोनिया गांधी से किसी समझौते का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि पार्टी इस मसले पर सरकार के रुख़ से सहमत नहीं है." हालांकि उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार की ओर से अब तक इस संबंध में उनसे कोई बातचीत नहीं हुई है. वामदलों ने दामों में बढ़ोत्तरी की स्थित में देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी है. | इससे जुड़ी ख़बरें तेल 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचा22 मई, 2008 | कारोबार 'तेल बिकेगा 200 डॉलर प्रति बैरल'07 मई, 2008 | कारोबार आपूर्ति की कमी से तेल रिकॉर्ड महंगा10 अप्रैल, 2008 | कारोबार भारत में तेल के दाम बढ़ने के ठोस संकेत24 जनवरी, 2008 | कारोबार तेल की क़ीमतों को लेकर चिंता22 अप्रैल, 2006 | कारोबार बड़े गैस भंडार का पता चला27 जून, 2005 | कारोबार ईरान से 50 लाख टन तेल का सौदा14 जून, 2005 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||