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ईरान से 50 लाख टन तेल का सौदा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और ईरान ने 22 अरब डॉलर के एक तेल सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत ईरान प्रति वर्ष भारत को 50 लाख टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) देगा. अधिकारियों का कहना है कि तेल की आपूर्ति 2009 से शुरु होगी और 25 साल तक जारी रहेगी. यह समझौता नेशनल ईरानियन गैस एक्सपोर्ट कंपनी और भारत की तीन तेल कंपनियों के बीच हुआ है जिसमें इंडियन ऑयल कंपनी, गेल और भारत इंडिया हैं. इस सौदे पर साल की शुरुआत में समझौता हुआ था. भारत के पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर की उपस्थिति में यह समझौता हुआ. और इसके बाद ईरान के पेट्रोलियम मंत्री बिजान नामदार ज़ंघानेश ने कहा, "हम एलएनजी की क़ीमतों को लेकर एक समझौते पर पहुँच गए हैं और निर्यात 2009 से शुरु हो जाएगा. उम्मीद है कि जल्दी ही हम प्रतिवर्ष 50 लाख टन एलएनजी भारत को देने लगेंगे." उन्होंने बताया कि ईरान के दो तेल क्षेत्रों में भारत को तेल उत्पादन के अधिकार देने के विषय में भी बातचीत जारी है. भारत में उसकी ज़रुरत का सिर्फ़ आधा ही पेट्रोलियम उत्पादन होता है और वह इस वक़्त 70 प्रतिशत कच्चे तेल का उत्पादन करता है. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में जिस तरह से तेल की क़ीमतें बढ़ीं हैं उसका भारतीय बाज़ार पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है. |
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