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तेल की क़ीमत रिकॉर्ड ऊँचाई पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कच्चे तेल की क़ीमत मंगलवार को रिकॉर्ड ऊँचाई तक जा पहुँची. न्यूयॉर्क के बाज़ार में पिछले 21 सालों में पहली बार इसकी क़ीमत 45 डॉलर से पार करके 45.04 डॉलर तक जा पहुँची. इराक़ में चल रही गड़बड़ियों की वजह से जब से तेल का उत्पादन बाधित हुआ है तभी से तेल की क़ीमतों में अस्थिरता चल रही है. उल्लेखनीय है कि इराक़ सऊदी अरब के बाद दुनिया का दूसरा बड़ा तेल उत्पादक है. क़ीमतों में हो रही इस बढ़ोत्तरी की वजह से जहाँ ब्रिटिश एयरवेज़ जैसी कंपनियों को अपना किराया बढ़ाना पड़ा है वहीं तेल कंपनी शेल्स ने मैक्सिको की खाड़ी में अपने उत्पादन में कटौती कर दी है. रूस में यूकोस कंपनी के टैक्स को लेकर जो समस्या है उसके चलते आशंका जताई जा रही है कि यूकोस का भी उत्पादन बंद हो सकता है. यूकोस दुनिया का 2 प्रतिशत उत्पादन करता है. दूसरी ओर तेल की क़ीमतों में इस बढ़ोत्तरी से ब्रिटेन में भी पेट्रोल की क़ीमतें बढ़ने का ख़तरा नज़र आ रहा है. कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में तेल की क़ीमतें और बढ़ सकती हैं. इस मसले पर अगले महीने ओपेक की बैठक भी होने वाली है. |
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