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तेल की क़ीमतें बढ़ाने की तैयारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पेट्रोल और डीजल की क़ीमतों को बढ़ाने के बारे में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बुधवार को होनेवाली बैठक में फ़ैसला लिया जा सकता है. विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक है. उनका कहना था कि सरकार अभी इस मुद्दे पर विचार कर रही है. ये पूछे जाने पर कि क्या मंत्रिमंडल की बैठक के एजेंडे में पेट्रोल और डीजल की क़ीमतों का मुद्दा शामिल है, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि एजेंडे में क्या है, इसके बारे में वो अभी कुछ नहीं बता सकते. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने सोमवार को कहा था कि सरकार कच्चे तेल के क़ीमतों में भारी बढ़ोत्तरी के असर से उपभोक्ताओं को पूरी तरह मुक्त रखने की स्थिति में नहीं है. प्रधानमंत्री ने एसोचैम की वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए कहा था,'' हम सब्सिडी बिल और बढ़ने नहीं दे सकते. न ही कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही कीमतों के असर से उपभोक्ताओं को पूरी तरह मुक्त रखने की गुंजाइश हमारे पास है.'' मनमोहन का आश्वासन मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार ग़रीब लोगों को एक हद तक इस असर से मुक्त रख सकती है. लेकिन विकास की गति बनाए रखने के लिए तेल का बाज़ार मूल्य निर्धारण आवश्यक है. उल्लेखनीय है कि पेट्रोलियम पदार्थों पर दी जाने वाली सरकारी छूट के कारण घाटा 225 हज़ार करोड़ तक जा पहुँचा है. भारतीय तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड को होने वाला घाटा लगातार बढ़ रहा है और ये कंपनियाँ सरकार पर दबाव बढ़ा रही हैं कि वह तेल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी करे. लेकिन इस संभावित बढ़ोत्तरी का सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दल और विपक्षी भाजपा विरोध कर रहे हैं और उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी है. |
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