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लाखों चीनी खिलौने वापस लेगी मैटल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
खिलौना बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी मैटल इनकॉर्पोरेटेड ने विश्व बाज़ार से चीन में बने अपने आठ लाख खलौनों को वापस लेने का फ़ैसला किया है. इससे भारत से भी साढ़े सात हज़ार खिलौने वापस होंगे. कंपनी ने यह क़दम एक शोध के बाद उठाया जिसमें पाया गया कि इन खिलौनों में सीसे (लेड) की मात्रा अधिक है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. मैटल इंडिया के प्रबंध निदेशक संजय लूथरा ने बीबीसी को बताया कि कंपनी अपने बनाए हुए इन खिलौनों की गुणवत्ता बनाए रखना चाहती है. संजय लूथरा ने बताया, ''भारतीय बाज़ार से साढ़े सात हज़ार खिलौने वापस लिए जा रहे हैं. ये खिलौने जनवरी में बाज़ार मे उतारे गए थे.'' शोध के मुताबिक़ इन खिलौनों में सीसे की अधिक मात्रा पाई गई है और जब बच्चे इन खिलौनों को मुँह में डालेंगे तो उन्हें मानसिक बीमारी होने की आशंका है. बच्चों के लिए हानिकारक इन खिलौनों से खेलने से बच्चों की तर्क क्षमता (आई क्यू) पर बुरा असर पड़ सकता है और साथ ही पेट दर्द की बीमारी का भी ख़तरा है. जिन खिलौनों को बाज़ार से वापस लिया गया है उनमें मशहूर बार्बी गुड़िया के साथ-साथ दूसरे खिलौने भी शामिल हैं. संजय लूथरा ने कहा कि इनमें वो खिलौने भी हैं जो बच्चों को दाँत निकलने के समय चूसने के लिए दिए जाते हैं. मैटल इनकॉर्पोरेटेड एक अमरीकी कंपनी है और इनके खिलौने चीन में बनाए जाते हैं. वैसे कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक उसे इन खिलौनों के प्रयोग के बाद किसी तरह की बीमारी की कोई शिकायत नही मिली है. कंपनी ने कहा कि जो भी माता-पिता अपने बच्चों के लिए ये खलौने ले गए हैं वो वापस कर सकते हैं. गुणवत्ता पर सवाल इस मामले पर पर्यावरण पर काम करने वाली दिल्ली के एक गैर सरकारी संगठन 'टॉक्सिक लिंक' के परवींद्र सिंह का कहना है, ''यह तीसरी बार है जब मैटल ने अपने खिलौने वापस लिए हैं. इससे पहले के शोध में पाया गया था कि खिलौनों में सीसा इस्तेमाल में लाया गया है.''
उन्होंने आगे कहा,''शोध के अनुसार आम खिलौनों में सीसा प्रयोग होता है लेकिन कंपनियों के ब्रांडेड खिलौनों में इसका इस्तेमाल सही नहीं है. इस पर रोक लगाने के लिए सरकार को क़दम उठाना चाहिए.'' हाल ही में मोबाइल कंपनी नोकिया ने भी बैट्री फटने की ख़बर आने के बाद बैट्री वापस लेने की बात कही थी. ये बैट्रियाँ भी चीन में ही बनी थीं. और अब चीन में बनने वाले खिलौनों में सीसा पाए जाने से चीन में बनने वाले उत्पादों की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें बाज़ार में आया चीनी कन्हैया03 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस मटैल ने लाखों खिलौने वापस मँगाए14 अगस्त, 2007 | पहला पन्ना नोकिया ने बैटरी बदलने की पेशकश की14 अगस्त, 2007 | कारोबार चीनी सामान को लेकर चिंतित अमरीका19 जुलाई, 2007 | पहला पन्ना बुज़ुर्गों के लिए जापानी खिलौने01 मई, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस बार्बी के मुक़ाबले एक अनोखी गुड़िया13 जनवरी, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस पटना में 'लालू जी' 'आउट ऑफ़ स्टॉक'08 जून, 2005 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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