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बार्बी के मुक़ाबले एक अनोखी गुड़िया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आमतौर पर बार्बी गुड़िया खिलौना बच्चों में बहुत लोकप्रिय है लेकिन अरब देशों में एक गुड़िया खिलौना उससे भी ज़्यादा लोकप्रिय हो रहा है और उसने बिक्री के नए रिकॉर्ड बनाए हैं. दरअसल यह गुड़िया खिलौना है - फुल्ला जो बार्बी की तरह से मासूम और ख़ूबसूरत तो है लेकिन उसने मुस्लिम परंपरा के अनुसार स्कार्फ़ ओढ़ रखा है जो मुस्लिम देशों में बहुत पसंद किया जाता है. यही वजह है कि फुल्ला गुड़िया अरब देशों बहुत लोकप्रिय हो रही है और उसने बार्बी को पीछे छोड़ दिया है. फुल्ला गुड़िया सिर से लेकर पाँव तक न सिर्फ़ परंपरागत मुस्लिम परिधान पहने हुए है बल्कि उसके साथ गुलाबी रंग की एक ऐसी चटाई या क़ालीन भी होती है जिसे मुसलमान नमाज़ पढ़ने के लिए इस्तेमाल करते हैं. जो माता-पिता अपनी बेटियों के लिए बार्बी को नहीं ख़रीदना चाहते हैं, फुल्ला उनके लिए बहुत अच्छा विकल्प साबित हो रही है. मिस्र के न्यू बॉय डिज़ाइन स्टूडियो ने फुल्ला को 2003 में बाज़ार में उतार था और अरब देशों में इसकी बिक्री बहुत मज़बूत हुई है. फुल्ला के ब्रांड मैनेजर फ़वाज़ आबिदीन कहते हैं, "आपको एक ऐसा चरित्र सामने लाना होता है जिसे माता-पिता और बच्चे सभी पसंद करें. फुल्ला गुड़िया ईमानदार है, प्रेम करने वाली और दूसरों का ख़याल रखने वाली होने के साथ-साथ अपने माता-पिता की इज़्ज़त करती है." डॉक्टर और शिक्षक फुल्ला गुड़िया को अकेले ही दिखाया गया है और बार्बी गुड़िया के पूर्व बॉय फ्रेंड यानी पुरुष मित्र केन की तरह का कोई चरित्र लाने की योजना भी नहीं है.
अलबत्ता डॉक्टर फुल्ला और शिक्षक फुल्ला बाज़ार में लाने की योजना है क्योंकि ये पेशे महिलाओं के लिए सम्मानजनक माने जाते हैं. फुल्ला गुड़िया की अलमारी को मिस्र के बाज़ारों के अनुरूप आधुनिक कपड़ों से सजाया गया है जिनमें जींस के साथ-साथ रंग-बिरंगे स्कार्फ़ भी हैं, जैसे कि युवा महिलाएँ पहनना पसंद करती हैं. काहिरा में एक दुकान के सेल्समैन तारिक मोहम्मद कहते हैं, "फुल्ला की बिक्री इसलिए ज़्यादा होती है क्योंकि वह हमारे अरब मूल्यों के ज़्यादा नज़दीक है, वह कभी-भी अपनी टांग या बाँह का प्रदर्शन नहीं करती है." मुस्लिम महिलाओं में सिर पर स्कार्फ़ ओढ़ने के प्रति बढ़ते रुझान के बीच ही जब फुल्ला गुड़िया बाज़ार में आई तो इसे काफ़ी पसंद किया जाने लगा है और इसकी माँग लगातार बढ़ती जा रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें अब अंतरिक्ष यानों के भी खिलौने20 जनवरी, 2004 | कारोबार 1200 रुपए में 'अल सहाफ़' 19 अप्रैल, 2003 | कारोबार बुश पर बना खिलौना27 अगस्त, 2003 | कारोबार पटना में 'लालू जी' 'आउट ऑफ़ स्टॉक'08 जून, 2005 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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