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बुलंदी पर है पाकिस्तान का आईटी उद्योग | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की तरह पाकिस्तान में भी सूचना तकनीक (आईटी) उद्योग तेज़ी से तरक्की कर रहा है जहाँ आईटी क्षेत्र के निर्यात में 50 फ़ीसदी की गति से वृद्धि हो रही है. हाल ही में पाकिस्तान के कराची में आईटी, दूरसंचार और मीडिया शो 'आईटीसीएन एशिया-2007' आयोजित हुआ. इस शो के ज़रिए पाकिस्तान ने अपनी आईटी क्षमता को दर्शाने की कोशिश की. अमरीकी आईटी गतिविधियों के केंद्र सिलिकॉन वैली में कारोबार करने वाले फ़ारूक़ अहमद भी इसमें शरीक़ हुए. वो कहते हैं, "आठ-नौ साल पहले भारत और चीन में निवेशकों की सक्रियता दिखी लेकिन वास्तविक निवेश कुछ ख़ास नहीं हुआ. इसका एक बड़ा कारण यह था कि निवेशक दोनों देशों में पैसा लगाने के जोख़िम का आकलन करने में विफल रहे." उनका कहना है, "लेकिन धीरे-धीरे स्थितियाँ बदली और तेज़ी से पूँजीनिवेश होने लगा." फ़ारूक़ अहमद कहते हैं कि यही कहानी पाकिस्तान में दोहराई जा सकती है. लगातार विकास पाकिस्तान सॉफ़्टवेयर एक्सपोर्ट बोर्ड के आँकड़ों के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में आईटी निर्यात 50 फ़ीसदी सालाना की गति से बढ़ा है और जून 2007 में यह एक अरब 40 करोड़ डॉलर पर पहुँच गया. हालाँकि निर्यात का ये आँकड़ा भारत की तुलना में कहीं नहीं ठहरता. भारत ने मार्च में समाप्त हुए वित्त वर्ष के दौरान आईटी निर्यात से 31 अरब डॉलर की राशि जुटाई.
पाकिस्तान सॉफ़्टवेयर हाउसेस एसोसिएशन (पाशा) के अध्यक्ष अशरफ़ कपाड़िया कहते हैं, "इसमें किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि भारत की कमाई बीसगुना ज़्यादा है. भारत के पास हमसे आठगुना ज़्यादा लोग हैं." उनका कहना कि पाकिस्तान की ताकत कम लागत और अपने आप को साबित करने का जज़्बा है. वो कहते हैं, "मैं अपनी कंपनी की सहयोगी इकाई बंगलौर में चलाता हूँ लेकिन वहाँ लागत 30 फ़ीसदी ज़्यादा हो जाती है. हम काम पाने के लिए तत्पर होते हैं. इसलिए जो काम भारतीय या चीनी कंपनियाँ पेचीदा या कम मुनाफ़े की वजह से छोड़ देती हैं, उन्हें हम पूरा करते हैं." पिछले कुछ वर्षों में सिस्टम्स लिमिटेड, एटिलाइज़, एलएमके रिसोर्सेज जैसी कंपनियों ने आईबीएम, एनसीआर जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से हाथ मिला कर पाकिस्तान को आईटी और आईटी आधारित सेवाओं का अगला ठिकाना बनाने की कोशिश की है. नए उत्पाद पाकिस्तानी उद्यमियों की नई पीढ़ी इसे आगे बढ़ा रही है. बशीर शेख़ भी इनमें से एक हैं जो इनोव-8 नामक कंपनी के अध्यक्ष हैं. बशीर और इनके भाई हसनैन अमरीका में एक दशक बिताने के बाद पाकिस्तान लौटे हैं.
इस कंपनी के उत्पादों में से एक जावा आधारित मोबाइल भुगतान प्रणाली है जिसे जल्दी ही पाकिस्तान की सबसे बड़ी मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी मोबिलिंक के ज़रिए उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जाएगा. हालाँकि विकास की इस राह में कई चुनौतियाँ भी हैं. इनमें से एक है, कुशल आईटी उद्यमियों की कमी. पाशा के अध्यक्ष अशरफ़ कपाड़िया कहते हैं, "अगर हम मौजूदा वृद्धि दर को बनाए रखें तो अगले साल 25 हज़ार लोगों की और ज़रूरत पड़ेगी. इनमें से दो हज़ार तो लाहौर, कराची और इस्लामाबाद विश्वविद्यालयों से मिल जाएंगे और दस से 15 हज़ार अन्य विश्वविद्यालयों से. हालाँकि इस दिशा में काफ़ी काम करने की ज़रूरत है." पाकिस्तान की छवि पाकिस्तान की छवि भी एक चुनौती है. वहाँ के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ओवैस अहम ख़ान लेघारी कहते हैं, "मुझे पता है कि जब भी कोई कारोबारी कहता है कि वो पाकिस्तान जा रहा है तो उसके परिवार वाले चिंतित हो जाते होंगे. अंतरराष्ट्रीय मीडिया इस तरह की तस्वीर पेश कर रहा है जैसे पाकिस्तान की सड़कों पर क्लाशनिकोव रायफ़लों के साथ चरमपंथी घूमते रहते हैं."
लेघारी कहते हैं कि वो इस छवि को दुरूस्त करने की कोशिश कर रहे हैं. उनका कहना है, "सच्चाई यही है कि पाकिस्तान कारोबार करने के लिहाज से सुरक्षित जगह है. नए निवेश से हुई आय पर कोई कर नहीं देना पड़ता और कारोबार समेटने की शर्तें भी कड़ी नहीं है." उनके मुताबिक प्रशिक्षण और आईटी शिक्षा पर भी सरकार ध्यान दे रही है और पिछले पाँच वर्षों में सरकारी विश्वविद्यालयों पर निवेश तीन गुना बढ़ा है. वो कहते हैं, "अगर निवेश और माहौल ठीक रहा तो हमें भारत और चीन की तरह आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता." |
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