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वीज़ा पर भारत-अमरीका में टकराव | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और अमरीका के बीच इस मुद्दे पर कुछ मतभेद उभरते नज़र आ रहे हैं कि अमरीका में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियाँ अपने कर्मचारियों को किस तरह का वीज़ा दिलाती हैं. कुछ अमरीकी सीनेटरों ने अमरीका में ही कारोबार करने वाली नौ भारतीय कंपनियों को पत्र लिखकर पूछा है कि वे अपने कर्मचारियों के बारे में जानकारी मुहैया कराएँ और इस बारे में भी विस्तृत जानकारी दें कि कर्मचारियों को किस वीज़ा किस आधार पर दिया जाता है. अमरीका अधिकारियों ने चिंता जताई है कि अमरीका में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियाँ हुनरमंद अमरीकी पेशेवर लोगों को नौकरी देने से बचने की कोशिश कर रही हैं. भारत के वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने आगाह किया है कि अगर यह मामला गंभीर रूप लेता है तो इससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ सकता है. कमलनाथ विश्व व्यापार संगठन की बातचीत के लिए बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में हैं और उन्होंने कहा है कि वह इस मुद्दे को अमरीकी व्यापार प्रतिनिधि सुज़ान श्वाब के सामने रखेंगे और जी-4 देशों की बैठक में भी उठाएँगे. कमलनाथ ने एक बयान जारी करके कहा, "मैं सीनेटरों के पत्र का विवरण देखकर चकित हूँ. वीज़ा जैसे मामलों पर कोई भी बातचीत या फ़ैसले सरकारी स्तर पर किए जाते हैं और उसी स्तर पर बातचीत होनी चाहिए." "हुनरमंद कर्मचारियों को अस्थाई तौर पर एक से दूसरे देश में नियुक्त करना विश्व आर्थिक सेवाओं का एक अभिन्न हिस्सा है और इनका आव्रजन नियमों से कुछ लेना-देना नहीं है. इस तरह की गतिविधियों पर अगर किसी भी वजह से अनिश्चितता पैदा होती है तो इसका तेज़ी से बढ़ रहे व्यापार संबंधों पर असर पड़ सकता है." अस्थाई वीज़ा अमरीकी अधिकारी हर साल लगभग 65 हज़ार लोगों को अस्थाई तौर पर अमरीका में काम करने का वीज़ा देते हैं लेकिन हाल के महीनों में अमरीकी अधिकारियों ने चिंता जतानी शुरू कर दी है कि अनेक भारतीय कंपनियाँ कम वेतन-भत्तों पर भारत से कर्मचारियों की भर्ती कर रहे हैं जबकि अमरीका में उसी स्तर के कर्मचारी बहुत महँगे मिलते हैं. हाल के वर्षों में अमरीका भारत से अनुरोध करता रहा है कि वह अमरीकी व्यवसाय के लिए भी अपना बाज़ार खोले. बहुत सी अमरीकी कंपनियों ने भारत में कारोबार शुरू भी कर दिया है. उन्हें बहुत सी ऐसी कंपनियों ने आकर्षित किया है जिन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था में हो रही प्रगति का फ़ायदा उठाते हुए अच्छा स्थान बनाया है. भारत में हाल के वर्षों में वेतन-भत्तों में ख़ासी बढ़ोतरी हुई है और ऐसा बहुत सी विदेशी कंपनियों के लिए भारत में होने वाली आउटसोर्सिंग की बदौलत हो सका है लेकिन बहुत से अमरीकियों में डर बैठ गया है कि वे विदेशों में या विदेशों से अमरीका में आने वाले कम वेतन-भत्तों वाले कर्मचारियों की वजह से अपनी नौकरियाँ गँवा रहे हैं. कमलनाथ ने कहा है कि वह यह जानकर चिंतित हैं कि अमरीका ऐसे वीज़ा कोटा में कमी करने की योजना बना रहा है जो हर साल अस्थाई तौर पर काम करने के लिए जारी किए जाते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें एकतरफ़ा रियायतों की घोषणा03 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान से वीज़ा के लिए नई शर्तें02 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस भारतीयों के लिए आठ लाख वीज़ा02 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'यौन संबंध के बदले वीज़ा' देने के आरोप03 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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