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शुक्रवार, 02 मार्च, 2007 को 16:16 GMT तक के समाचार
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पाकिस्तान से वीज़ा के लिए नई शर्तें

फिंगर प्रिंट्स लेने की मशीन
नई शर्तों के अनुसार उंगलियों के निशान देने के लिए इस्लामाबाद या कराची जाना होगा
ब्रिटेन सरकार ने पाकिस्तान से आने वाले लोगों को वीज़ा देने के लिए दो नई शर्तं शुरू की हैं जिनमें टीबी की जाँच के अलावा उंगलियों के निशान यानी फिंगर प्रिंट्स के नमूने देना भी ज़रूरी होगा.

इस्लामाबाद में ब्रितानी उच्चायोग शुक्रवार को इन नई शर्तों की घोषणा एक औपचारिक वक्तव्य जारी करके की.

इन नई शर्तों के अनुसार किसी भी देश का नागरिक अगर पाकिस्तान से ब्रिटेन जाने के लिए वीज़ा के लिए आवेदन करता है तो उसे बॉयोमैट्रिक फिंगर प्रिंट्स देना ज़रूरी होगा. इसके अलावा वीज़ा की अर्ज़ी देने वालों को टीबी का टेस्ट भी कराना होगा.

ब्रितानी उच्चायोग के बयान के मुताबिक उंगलियों के निशान लेने की व्यवस्था दुनिया के साठ से ज़्यादा देशों में पहले से ही चल रही है जिनमें श्रीलंका, इथियोपिया और हॉलैंड जैसे देश भी शामिल हैं.

उच्चायोग ने बताया है कि ब्रिटेन आने के लिए जिन देशों के नागरिकों को वीज़ा की ज़रूरत होती है उन सभी देशों में जनवरी 2008 तक वीज़ा के लिए उंगलियों के निशान देने की व्यवस्था लागू करने का इरादा रखता है.

इस व्यवस्था के तहत अपनी पहचान बदलकर या ग़ैरक़ानूनी तौर पर या फिर किसी और के दस्तावेज़ों पर सफ़र करने के मामलों को रोका जा सकेगा.

भविष्य में हवाई अड्डों पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक दरवाज़े लगाने की योजना भी बनाई जा रही और फिंगर प्रिंट्स की व्यवस्था से उन दरवाज़ों से गुज़रने में आसानी होगी.

उंगलियों के निशान देने के लिए अब वीज़ा की अर्ज़ी देने वालों को इस्लामाबाद या कराची में ब्रितानी उच्चायोग में ख़ुद पेश होना होगा.

ब्रितानी अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि इस नई व्यवस्था से अवैध रूप से ब्रिटेन में दाख़िल होने वाले लोगों की संख्या पर नियंत्रण किया जा सकेगा.

हिदायत

ब्रितानी उच्चायोग पाकिस्तान में प्रचार माध्यमों के ज़रिए लोगों को उन एजेंसियों से सावधान रहने की हिदायत कर रहा है जो ग़ैरक़ानूनी तौर पर लोगों को विदेशों में भेजते हैं.

ब्रिटेन में छह महीने से ज़्यादा मुद्दत के लिए जाने वालों को अब वीज़ा लेने से पहले इंटरनेशलन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ माइग्रेशन यानी प्रवासियों के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठन (आईओएम) के तहत काम करने वाले क्लीनिक से टीबी की जाँच करवानी होगी.

टीबी से मुक्त क़रार दिए जाने वाले उम्मीदवार वीज़ा की अपनी अर्ज़ी जमा करा सकेंगे लेकिन इस बीमारी के शिकार लोगों को पहले अपना इलाज कराने के लिए कहा जाएगा.

आईओएम इसके टेस्ट और सर्टिफ़िकेट के लिए शुल्क भी वसूल करेगा और ये सर्टिफ़िकेट छह महीने के लिए वैध होगा.

उच्चायोग के एक अधिकारी का कहना था कि ब्रिटेन ख़ुद अपने यहाँ टीबी की बढ़ती हुई चुनौती का सामना कर रहा है. इस नई शर्त से देश और विदेशों में टीबी पर क़ाबू पाने में मदद करेगी.

अलबत्ता कुछ पाकिस्तानी लोगों का कहना है कि इन नई शर्तों से आम आदमी के लिए वीज़ा हासिल करना और मुश्किल हो जाएगा.

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