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शनिवार, 30 अप्रैल, 2005 को 11:00 GMT तक के समाचार
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अवैध आप्रवासियों की समस्या का सच
अख़बार
कुछ अख़बारों में भी अवैध आप्रवासियों का मुद्दा उठाया गया
ब्रिटेन के चुनावों में जो मुद्दा सबसे अधिक विवादास्पद माना जा रहा है वो है अवैध आप्रवासियों का मुद्दा.

कंज़रवेटिव पार्टी ने शरण मांगने वालों और आप्रवासियों के लिए कोटा प्रणाली लागू करने का वादा किया है जबकि लेबर पार्टी का रवैया इस मामले में उदारवादी है.

आइए इस मसले से जुड़े सही तथ्यों के बारे में जानते हैं.

कंज़रवेटिव पार्टी के नेता डेविड डेविस ने एक बार कहा था कि ब्रिटेन में ढाई लाख ऐसे लोग हैं जिन्हें यहां रहने की अनुमति नहीं दी गई है और इन सभी लोगों को अपने देश लौट जाना चाहिए था लेकिन वो नहीं लौटे.

कुछ आकड़ों के अनुसार यह संख्या और अधिक हो सकती है.

पृष्ठभूमि

ब्रिटेन में लोगों की गिनती करना बहुत ही मुश्किल काम है. सन् 2001 की जनगणना के समय हर घर में जाकर गिनती की क़वायद की गई लेकिन इसके बाद भी बिल्कुल सही संख्या मिल नहीं पाई.

ऐसी परिस्थिति में ऐसे लोगों की संख्या गिननी और मुश्किल है जो अवैध आप्रवासी हैं या ऐसे लोग जिनकी शरण मांगने संबंधी याचिका ख़ारिज हो गई हो या फिर जो बिना किसी दस्तावेज़ के ब्रिटेन में रह रहे हों.

माइकल हॉवर्ड
कंज़रवेटिव पार्टी आप्रवासियों के लिए कोटा प्रणाली चाहती है

ब्रिटेन की एक संस्था माइग्रेशन वॉच के अनुसार 1997 के बाद से ब्रिटेन में शरण देने या न देने पर 4,99000 फैसले हुए. इसमें से 314000 मामलों में शरण नहीं देने का फैसला किया गया.

क़रीब 75000 आवेदकों अपने देश लौट गए और बाकी अब भी यहीं रह रहे हैं.

संडे टाइम्स अख़बार ने एक बार ब्रिटेन में अवैध आप्रवासियों की संख्या तकरीबन पांच लाख आंकी थी.

यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन में आप्रवास मामलों के जानकार प्रोफेसर जॉन सॉल्ट ने गृह मंत्रालय के लिए एक रिपोर्ट बनाई थी लेकिन इस रिपोर्ट में संख्या के बारे में कोई अनुमान नहीं लगाया गया.

तथ्य

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आंकड़े कुछ भी कहें, मुद्दा तो बन ही गया है

ब्रिटेन में ऐसे लोगों के आंकड़ों को लेकर विवाद होते रहे हैं. ढाई लाख अवैध आप्रवासियों की संख्या पर भी विवाद हैं क्योंकि कई ऐसे लोग भी हैं जो बिना किसी को बताए ब्रिटेन छोड़ कर जा चुके हैं.

हज़ारों लोग ऐसे हैं जिन्हें क्षमादान दिया गया यानी यहां रहने की अनुमति दे दी गई तो क्या ऐसे लोगों को अभी भी अवैध आप्रवासी माना जा रहा है.

कई लोग ऐसे हैं जिन्हें जबरन वापस भेजा नहीं जा सकता क्योंकि उनके देश ज़रुरी नहीं कि उन्हें वापस स्वीकार करें. ऐसे देशों की सूची में चीन भी है. कुछ देश ऐसे हैं जहां लोगों को जबरन भेजना ठीक नहीं माना जाता मसलन इराक़.

इमीग्रेशन एडवायज़री सेवा के कीथ बेस्ट कहते हैं कि कई लोग ऐसे होते हैं जो शरण मांगने के लिए एक से अधिक आवेदन करते हैं लेकिन कागज़ी कार्रवाई में इस पर कोई ध्यान नहीं देता.

प्रोफेसर सॉल्ट ने अपनी रिपोर्ट में इन्हीं मुश्किलों को उजागर करते हुए कहा है कि गिनती के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए.

कुछ हलकों में पांच लाख अवैध आप्रवासियों की संख्या के बारे में सॉल्ट कहते हैं कि अगर ब्रिटेन की सरकार क्षमादान के ज़रिए इस गिनती की कोशिश करे.

प्रोफेसर सॉल्ट ने कई यूरोपीय देशों में अवैध आप्रवासियों की संख्या की तुलना के ज़रिए मुश्किलों का वर्णन किया है.

तो सच क्या है?

ब्रिटेन में अवैध आप्रवासियों की संख्या के बारे में कुछ भी कह पाना मुश्किल ही नहीं बल्कि फिलहाल असंभव है.

किसी भी आधिकारिक आंकड़े के अभाव में कंज़रवेटिव अपने गुना भाग से कुछ आकड़े दे रहे हैं जो सही भी हो सकते हैं और ग़लत भी.

आंकड़े जो भी हो यह फिर भी सच है कि इस मुद्दे पर इन चुनावों में राजनीति हो रही है और जमकर बयानबाज़ी भी की जा रही है.

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