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भारतीयों के लिए आठ लाख वीज़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में अमरीका के राजदूत डेविड मल्फर्ड ने कहा है कि इस साल भारतीय नागरिकों के लिए क़रीब आठ लाख वीज़ा जारी किए जा सकते हैं. पिछले वर्ष अमरीका जाने वाले भारतीयों के लिए पांच लाख वीज़ा जारी किए गए थे. मल्फर्ड का कहना था कि वीज़ा जारी करने की प्रक्रिया को अब और सरल कर दिया गया है. जहां पहले अमरीकी वीज़ा लेने में छह महीने लगते थे उसे घटाकर छह दिन कर दिया गया है और यही कारण है कि भारतीयों के लिए अधिक वीज़ा जारी हो सकेंगे. उनका कहना था ' मेक्सिको से सबसे अधिक लोग अमरीका आते हैं. आठ लाख वीज़ा के साथ भारत दूसरे नंबर पर पहुंच जाएगा वो भी तब जब भारत के साथ हमारी सीमाएं नहीं हैं. ' दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों के तहत वीज़ा नियमों में काफी ढील दी जा रही है और अमरीका का एच 1बी वीज़ा पाने वालों में सबसे अधिक भारतीय ही हैं. पिछले दिनों परमाणु समझौते के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों के बीच संबंधों को बढ़ाने पर काफी ज़ोर दिया जा रहा है. यही कारण है कि अमरीका ने भारत में और पूंजी निवेश करने का भी फ़ैसला किया है. मल्फर्ड के अनुसार अमरीका आने वाले एक साल में एक अरब डालर से अधिका का निवेश भारत में करेगा. हालांकि उधर अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने अमरीकी नागरिकता प्राप्त करने की फीस बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. नागरिकता और अप्रवास विभाग ने गुरुवार को घोषणा की कि वो नागरिकता फॉर्म का शुल्क 330 डॉलर से बढ़ाकर 595 डॉलर करना चाहते हैं और क़ानूनन अमरीकी नागरिक बनने की फीस 180 डॉलर से बढ़ाकर 1370 डॉलर करने के पक्ष में हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें बच्चों के लिए वीज़ा में ढील | भारत और पड़ोस वीसा के लिए फ़िंगरप्रिंट | भारत और पड़ोस पाकिस्तान के बच्चों को वीज़ा में ढील08 अक्तूबर, 2003 को | भारत और पड़ोस वह पाकिस्तानी होना चाहती है पर...10 जुलाई, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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