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वह पाकिस्तानी होना चाहती है पर... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उसने पाकिस्तान जाकर इस्लाम कबूल कर लिया फिर पाकिस्तान के नागरिक अमान ख़ान से शादी कर ली और अब वह माँ बनने वाली है लेकिन अब पाकिस्तान की सरकार उसे निर्वासित करने की बात कर रही है. पच्चीस बरस की डॉक्टर हफ़सा अमान, जो पहले दिव्या दयानंदन थीं, मूल रुप से केरल की रहने वाली हैं. हालांकि उनके पास हाईकोर्ट का स्थगन आदेश है लेकिन पाकिस्तान के अधिकारी मान ही नहीं रहे हैं. बीबीसी से हुई बातचीत में अमान ख़ान ने बताया कि दोनों की मुलाक़ात 1995 में उक्रेन में हुई थी जहाँ दोनों डॉक्टरी पढ़ने गए हुए थे. वे बताते हैं, "पहले दोनों में दोस्ती हुई फिर प्यार हो गया. वहीं मैंने वादा किया था कि मैं उससे शादी करुँगा." "बाद में वह भारत चली गई लेकिन हम एक दूसरे के संपर्क में रहे, ईमेल से और फ़ोन से." डॉक्टर अमान बताते हैं कि उसके बाद वह एक महीने का वीसा लेकर पाकिस्तान गईं. उन्होंने वहाँ इस्लाम कबूल किया फिर दोनों ने शादी कर ली. इस शादी के आधार पर पाकिस्तान के अधिकारियों ने दो बार उनका वीसा आगे बढ़ाया लेकिन अब वे कह रहे हैं कि वीसा आगे नहीं बढ़ाएँगे और उन्हें वापस जाना होगा. वे पेशावर से 40 किलोमीटर दूर एक कस्बे में रहते हैं. 'देशों की दोस्ती दिखावा है'
वे कहती हैं, "दोनों देशों के नेता और अधिकारी भले ही दोस्ती की बात कर रहे हों, लेकिन वह सब दिखावा है." "मेरा मामला तो प्रतिनिधि मामला है, यदि इस मामले में कुछ नहीं हो रहा है तो दोस्ती कहाँ हो रही है." वे बताती हैं कि उन्हें पाकिस्तान में रहना अच्छा लग रहा है और लोगों का व्यवहार बहुत अच्छा है. डॉक्टर हफ़सा अमान कहती हैं, "मुझे तो पता नहीं था कि पाकिस्तान में लोग भारत के बारे में क्या सोचते हैं, मुझे तो सब यहीं आकर पता चला." तीसरा देश यदि पाकिस्तान की सरकार नहीं मानी तो क्या होगा, इस सवाल पर वे कहती हैं कि अधिकतम यही हो सकता है कि हम किसी तीसरे देश में जाकर मानवीयता के आधार पर रहने की अनुमति माँगें. उनका कहना है कि यदि उन्हें पाकिस्तान सरकार नागरिकता नहीं देना चाहती तो किसी तीसरे देश में रहने की व्यवस्था करवा दे. डॉक्टर हफ़सा अमान के माता पिता को उनका पाकिस्तान जाना और इस्लाम स्वीकार करना बिलकुल पसंद नहीं आया था इसलिए उनके भारत लौटने के रास्ते बंद ही हो गए हैं. भारत सरकार के अधिकारियों से उन्होंने अभी तक सहायता नहीं माँगी है, उन्हें लगता है कि वे भी इस मामले में कोई मदद नहीं करेंगे. फ़िलहाल मामला हाईकोर्ट में है और हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि वह क्यों हफ़सा अमान को नागरिकता नहीं देना चाहती. सरकार का जवाब अभी आना बचा है. |
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