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मंगलवार, 12 जून, 2007 को 12:26 GMT तक के समाचार
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आईटी गुरु हैं 'दूल्हे नंबर वन'

राफ़िया ख़ातून बेटी के साथ
राफ़िया ख़ातून जैसी कई महिलाएँ हैं जो बेटी की शादी के लिए वेबसाइट की मदद ले रही हैं
भारत में एक दशक पहले तक सरकारी कर्मचारी और अकाउंटेंट विवाह प्रस्तावों के लिए पहली पसंद हुआ करते थे. आज उनकी जगह ली है सूचना तकनीकी के क्षेत्र में सक्रिय आईटी गुरुओं ने.

दरअसल, सरकारी कर्मचारी और एकाउंटेंट को इसलिए पसंद किया जाता था क्योंकि माना जाता था कि उनके पास पक्की नौकरी के अलावा नियमित आमदनी और जीवनभर के लिए रोज़गार है.

लेकिन सूचना तकनीकी (आईटी) की हवा ने लोगों की इस सोच को भी बदल दिया है और विवाह के बाज़ार में आईटी कामगारों की माँग ज़ोरों पर है.

आईटी टॉप पर

इंटरनेट के ज़रिए युवक-युवतियों को दांपत्य सूत्र में बांधने वाले भारत मेट्रीमनी डॉटकॉम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुरुगावेल जानकीरमन कहते हैं, "इन लोगों की माँग पेशेवेर दुनिया में ही नहीं है, बल्कि शादी के बाज़ार में भी ये टॉप पर हैं."

राफ़िया ख़ातून भी ऐसी ही एक माँ हैं जो एक ख़ास मिशन पर हैं. मिशन है 28 वर्षीय बेटी राक्शी के लिए दूल्हा तलाशना.

 मेरे ज़माने की बात अलग थी. लोग ज़्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे. हमारा बाहरी दुनिया के साथ ज़्यादा सरोकार नहीं था, इसलिए हमारे माता-पिता सोचते थे कि सरकारी कर्मचारी या डॉक्टर और एकाउंटेंट ही बेटियों के लिए उत्तम वर हैं. हमने तो तकनीकी पेशेवरों के बारे में सुना तक नहीं था
राफ़िया ख़ातून

यही वजह है कि राफ़िया ख़ातून ने बेटी को भारत मेट्रीमनी डॉटकॉम की वेबसाइट पर लॉग इन करने के लिए कहा. इस वेबसाइट का दावा है कि इसके भारतभर में एक करोड़ से ज़्यादा उपभोक्ता हैं.

वेबसाइट न केवल दावा करती है कि मनचाहा जीवनसाथी ढूँढा जा सकता है बल्कि उसका कहना है कि यदि बात नहीं बनी तो उसके यहाँ विवाह सलाहकार भी मौजूद हैं जो इस काम में भरपूर मदद कर सकते हैं.

बदलती तस्वीर

राफ़िया ख़ातून कहती हैं, "मेरे ज़माने की बात अलग थी. लोग ज़्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे. हमारा बाहरी दुनिया के साथ ज़्यादा सरोकार नहीं था, इसलिए हमारे माता-पिता सोचते थे कि सरकारी कर्मचारी या डॉक्टर और एकाउंटेंट ही बेटियों के लिए उत्तम वर हैं. हमने तो तकनीकी पेशेवरों के बारे में सुना तक नहीं था."

दरअसल, भारत में उदारीकरण का दौर शुरू होने के बाद तकनीकी सेवा क्षेत्र का बहुत तेज़ी से विकास हुआ और लाखों लोगों को रोज़गार मिला.

आईटी पेशेवर
अर्थव्यवस्था में उछाल का सीधा लाभ सूचना तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को मिल रहा है

युवा इंजीनियर और कंप्यूटर साइंस के स्नातक इन नौकरियों के लिए सबसे उपयुक्त थे और उन्होंने इसका जमकर लाभ उठाया.

भारत मैट्रीमोनी के जानकीरमन कहते हैं, "आईटी क्षेत्र में काम कर रहे युवा 30 से 40 हज़ार रुपए महीना वेतन पाते हैं और वो भी कैरियर की शुरूआत में."

मुंबई में डाटामैटिक्स में तकनीकी प्रबंधक के पद पर कार्यरत फ़्रेंक रमन का कहना है, "काश! जब मैं जवान था तब ये सब होता. तब मैं इसका फ़ायदा उठा सकता था, लेकिन अब मैं शादीशुदा हूँ."

ताज़ा आर्थिक भविष्यवाणी भी आईटी दूल्हों के लिए ख़ुशियाँ लेकर आई है.

भारतीय अर्थव्यवस्था नौ फ़ीसदी की दर से बढ़ रही है और विश्लेषकों का कहना है कि वर्ष 2010 तक सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में तकनीकी क्षेत्र का योगदान 10 प्रतिशत के लगभग होगा.

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