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अमरीका को संवारने में भारतीय सबसे आगे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में किए गए एक ताज़ा शोध के मुताबिक पिछले दस साल में अमरीकी अर्थव्यवस्था के विकास में भारतीय मूल के लोगों ने सबसे ज़्यादा योगदान दिया है. अमरीका के ड्यूक विश्वविद्यालय के तीन शोधकर्ताओं ने इस तथ्य को उजागर किया है. इस शोध में 28 हज़ार से ज़्यादा ऐसी कंपनियों को शामिल किया गया है जिनकी वार्षिक बिक्री 10 लाख डॉलर से ज़्यादा है और जिनमें बीस से अधिक लोग काम करते हैं. अमरीका में वर्ष 1995 से 2005 के दस सालों में खोली गई कंपनियों में से सबसे ज़्यादा कंपनियों में भारतीय मूल के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. दबदबा इस शोध के मुताबिक अमरीका में नई कंपनियाँ खोलने में भारतीय मूल के लोगों ने ब्रिटेन, चीन और जापान जैसे देशों को पछाड़ दिया हैं. पिछले दस साल में खुलीं करीब 7300 कंपनियों में से 26 प्रतिशत कंपनियाँ भारतीय मूल के लोगों के योगदान से खोली गईं. इनमें या तो कंपनी के मालिक भारतीय मूल के थे, या फिर अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक भारतीय मूल के अमरीकी थे. इन कंपनियों में से ज़्यादातर इंजीनियरिंग या टेक्नोलॉजी से संबंध रखती हैं. इस शोध के मुताबिक भारतीय मूल के लोगों की कंपनियों में से 46 प्रतिशत कंप्यूटर सॉफ़टवेयर और उसके विकास से जुड़ी हैं. भारतीय मूल के लोगों ने सबसे ज़्यादा कंपनियां न्यू जर्सी राज्य में खोली हैं जहां भारतीय मूल के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं. इसके अलावा कैलिफ़ोर्निया का सिलिकॉन वैली और टेक्सास कंपनी खोलने के मामले में भारतीयों की पसंदीदा जगह हैं. इसके अलावा न्यूयॉर्क, मैसाचुसेट्स और फ़्लोरिडा में भी बहुत सी कंपनियां खोली गई हैं. योगदान शोध करने वाले दल के प्रमुख प्रोफ़ेसर विवेक वाधवा ने कहा “इस शोध से पता चलता है कि अप्रवासी और खासकर भारतीय मूल के अप्रवासी अमरीकी अर्थव्यवस्था के विकास में कितना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.” वाधवा के मुताबिक अमरीका की कुल जनसंख्या में भारतीय मूल के लोगों की संख्या एक प्रतिशत से भी कम है. लेकिन अर्थव्यवस्था में योगदान की उनकी क्षमता इस अनुपात में कई गुना ज़्यादा है.” इस नए शोध से इस मिथक को भी तोड़ने की कोशिश की गई है कि दुनिया भर से लोगों के अमरीका आकर बसने से अमरीकी लोगों की नौकरियां छिन जाती हैं. इस शोध के मुताबिक वर्ष 2005 में अमरीका में अप्रवासियों की कंपनियों ने साढ़े चार लाख लोगों को रोज़गार दिया और 52 अरब डॉलर की बिक्री की. इस शोध के मुताबिक 1990 के दशक में अमरीका आने वाले भारतीय मूल के वैज्ञानिकों और सिलिकॉन वैली में इंजीनियरों की संख्या 600 गुना बढ़ गई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें इंटरनेट यूजर्स को 'टाइम' का सलाम17 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना वैज्ञानिक राजनीतिक दखलंदाज़ी के ख़िलाफ़14 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना बुश ने परमाणु विधेयक का स्वागत किया11 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस भारत-परमाणु समझौता अख़बारों में छाया09 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना आश्वस्त नहीं हैं भारत के परमाणु वैज्ञानिक10 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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