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बुधवार, 21 फ़रवरी, 2007 को 18:50 GMT तक के समाचार
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इंडियन-एयर इंडिया के विलय को मंजूरी
विमान
विलय के बाद सरकार को सालाना लगभग छह अरब रुपए का लाभ होगा
भारत में सरकारी क्षेत्र की विमानन कंपनियों इंडियन और एयर इंडिया के विलय को मंत्री समूह ने मंजूरी दे दी है.

विश्वव्यापी प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए विलय के इस प्रस्ताव को अब कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा.

दोनों कंपनियों के विलय पर विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता वाली मंत्री समूह की बैठक के बाद नागर विमानन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने कहा, "हम इस प्रक्रिया को 31 मार्च तक पूरा करना चाहते हैं."

 नई कंपनी प्रतियोगिता के दौर में सक्रिय भूमिका अदा करेगी. हम अन्य विमान कंपनियों को कड़ी चुनौती देंगे
प्रफुल्ल पटेल

नागर विमानन सचिव अशोक चावला ने कहा, "हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि विलय के बाद बनने वाली नई कंपनी का स्वरुप सरकारी ही रहेगा और इनके शेयर किसी और को नहीं दिए जाएँगे."

पटेल ने कहा कि कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद विलय की प्रक्रिया उसके अगले दो-तीन महीनों में पूरा कर लिया जाएगा.

प्रतियोगिता

उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियों के एकीकरण में एक या दो साल लग सकते हैं लेकिन विलय से एक बड़ी कंपनी अस्तित्व में आएगी.

प्रफुल्ल पटेल का कहना था कि विलय के बाद वर्ष 2011 तक नई कंपनी के पास 120 से ज़्यादा विमानों का बेड़ा होगा.

उन्होंने मुख्य रुप से घरेलू विमान सेवा देने वाली इंडियन और अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालित करने वाली एयर इंडिया के कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि विलय के बाद भी उनकी सेवा शर्तों, वरीयता और वेतन भत्ते पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

पटेल ने कहा, "नई कंपनी प्रतियोगिता के दौर में सक्रिय भूमिका अदा करेगी. हम अन्य विमान कंपनियों को कड़ी चुनौती देंगे."

उन्होंने कहा कि विलय पर लगभग दो अरब रुपए खर्च होंगे लेकिन सालाना लाभ में लगभग छह अरब रुपए की बढ़ोत्तरी होगी.

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