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रिलायंस को विदेशी कंपनियों से डर नहीं

रिलायंस फ्रेश
रिलायंस रिटेल की दुकानों में रोज़मर्रा की ज़रूरतों के सभी सामान मिलेंगे
रिलायंस रिटेल ने अगले पाँच वर्षों में भारतीय संगठित खुदरा बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी दस से 15 फ़ीसदी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.

इसी के तहत कंपनी देश भर में 'रिलायंस फ्रेश' नाम से दुकानों की श्रृंखला खोल रही है. रिलायंस ने पहले चरण में खुदरा कारोबार में 25 हज़ार करोड़ रूपए का निवेश करने का फ़ैसला किया है.

रिलायंस रिटेल के प्रमुख रघु पिल्लै ने बीबीसी को बताया कि उनकी कंपनी ने अदानी रिटेल का अधिग्रहण कर लिया है. हालाँकि यह सौदा कितने में हुआ है, ये बताने से उन्होंने इनकार कर दिया.

यह पूछे जाने पर कि क्या रिलायंस रिटेल इस क्षेत्र की दूसरी कंपनियों को भी खरीद सकती है, उन्होंने कहा, "देखिए अभी तो रिटेल में खेल शुरू ही हुआ है. लेकिन अगर अच्छे प्रस्ताव दिखते हैं तो दूसरी कंपनियों को खरीदा भी जा सकता है."

कंपनी हैदराबाद, जयपुर और चेन्नई के बाद दिल्ली के निकट नोएडा में मंगलवार से रिलायंस फ्रेश की 49 वीं शाखा आम लोगों के लिए खोल रही है.

कारोबारी मॉडल

पिल्लै ने साफ किया कि खुदरा दुकान खोलने से छोटे किराना दुकान बंद नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि कंपनी छोटे दुकानदारों के साथ मिल कर काम करेगी और उनके ज़रिए अपने सामानों की बिक्री कर सकती है.

 देखिए अभी तो रिटेल में खेल शुरू ही हुआ है. लेकिन अगर अच्छे प्रस्ताव दिखते हैं तो दूसरी कंपनियों को खरीदा भी जा सकता है
रघु पिल्लै

उन्होंने दावा किया कि कंपनी के कारोबारी मॉडल से जहाँ एक ओर छोटे व्यवसायी भी बने रहेंगे, वहीं अगले पाँच वर्षों में लगभग पाँच लाख लोगों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रोज़गार मिलेगा.

पिल्लै ने कहा कि अमरीकी कंपनी वालमार्ट और फ्रांस की कर्फ़्यूर को भारत में रिलायंस से कड़ी टक्कर मिलेगी क्योंकि उन्हें भारतीय ग्राहकों के बारे में ज़्यादा अनुभव नहीं है.

रिलायंस रिटेल किसानों से सीधे उचित मूल्य पर सामान खरीदेगी. पिल्लै का कहना है कि इससे किसानों को बिचौलियों के चंगुल से निकलने में भी मदद मिलेगी और उनके सामान देशी और विदेशी बाज़ारों तक पहुँच सकेंगे.

विदेशी निवेश

खुदरा कारोबार में विदेशी निवेश को पूरी तरह नहीं खोलने पर पिल्लै का कहना है कि ये फ़ैसला विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ में जारी वार्ता पर तय करेगा.

उन्होंने कहा कि यह मसला विकसित देशों में किसानों के मिल रही सब्सिडी, आयात पर ग़ैर शुल्क प्रतिबंधों और सेवा क्षेत्र में भारत की शिकायतों से जुड़ा हुआ है और इनका हल निकलने तक खुदरा कारोबार को पूरी तरह नहीं खोलना ही देश के हित में है.

अभी भारत के जीडीपी में खुदरा कारोबार की हिस्सेदारी लगभग लगभग 35 फ़ीसदी है और इसका आकार लगभग 300 अरब डॉलर का है लेकिन यह क्षेत्र संगठित नहीं हो सका है.

संगठित खुदरा कारोबार सिर्फ़ दो फ़ीसदी है. पिल्लै मानते हैं कि रिटेल कारोबार में बड़ी कंपनियों के उतरने से यह आँकड़ा अगले कुछ वर्षों में 10 फ़ीसदी हो जाएगा.

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