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रुपया आए कहाँ से, रुपया जाए कहाँ रे... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बजट के लिए पैसा कहाँ से आता है और कहाँ जाता है इसका हिसाब किताब देखें तो पता चलता है कि आय का बड़ा हिस्सा कर्ज से आता है और सबसे ज़्यादा खर्च कर्ज का ब्याज़ चुकाने में खर्च होता है. यदि बजट के आय व्यय को एक रुपए से समझना चाहें तो आकड़ा दिलचस्प हो जाता है. बजट का एक रुपया जुटाने के लिए सरकार को 25 पैसे कर्ज लेकर जुटाने पड़ते हैं जबकि 18 पैसे कार्पोरेट कर से आते हैं, 11 पैसे आयकर से और 20 पैसे उत्पाद शुल्क से. इसके अलावा 13 पैसे ग़ैरकर राजस्व से जुटते हैं और 8 पैसे सीमा शुल्क से, 3 पैसे अन्य करों से जुटते हैं और 2 पैसे गैर ऋण पूँजी प्राप्तियों से आते हैं. खर्च इसी तरह से खर्च का हिसाब किताब देखें तो रुपए का सबसे बड़ा हिस्सा यानी 22 पैसे ब्याज़ अदा करने में खर्च हो जाता है. 16 पैसे राज्यों को करों और शुल्कों का राज्य का हिस्सा बनता है, 18 पैसे केंद्रीय योजना की राशि होती है और इसके बाद 14 पैसे रक्षा मामलों पर खर्च किया जाता है. इसके अलावा 6 पैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विभिन्न सहायता के लिए दिए जाते हैं तो 5 पैसे राज्यों को योजना सहायता के लिए, 7 पैसे सब्सिडी में खर्च होते हैं. |
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