BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
गुरुवार, 24 फ़रवरी, 2005 को 08:40 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
बजट पर वामपंथी दलों का दबाव

वामपंथी नेता
वामपंथी सरकार की आर्थिक नीतियों से खफ़ा हैं
यह बजट केवल इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि उससे आने वाले साल के वित्तीय लेखे-जोखे का पता चलेगा.

यह इसलिए भी अहम है कि इससे वामपंथी दलों कितना दबाव काम आया, उसका भी अहसास हो जाएगा.

आर्थिक नीतियों को लेकर वामपंथी दल सरकार पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं.

माना जा रहा है कि आर्थिक नीतियों को लेकर वामपंथी दलों और कांग्रेस नेतृत्ववाली सरकार के साथ चल रही रस्साकशी के परिणाम इस बजट में साफ़ दिखाई दे सकते हैं.

वामपंथी दल रोज़गार,विदेशी निवेश और निजीकरण के मसले पर दबाव बनाए हुए हैं.

प्रस्ताव

वामपंथी बजट में क्या चाहते हैं, इसका लंबा-चौड़ा खाका वामपंथी दलों ने एक फ़रवरी को वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सौंपा था.

वामपंथियों के सुझाव
रोज़गार गारंटी योजना, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा के लिए 50 हज़ार करोड़ निर्धारित किए जाएं
टैक्स में बढ़ोतरी की जाए
रक्षा बजट में कटौती की जाए
पेट्रोलियम उत्पादों पर कर प्रणाली में सुधार किया जाए
मुनाफ़ा कमानेवाली सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों का निजीकरण नहीं किया जाए

लेकिन वामपंथी दल केवल इससे से ही संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने इस सिलसिले में सीधे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मुलाक़ात की और अपनी आपत्तियां जताईं.

वामपंथियों ने वित्त मंत्री से न्यूनतम साझा कार्यक्रम में किए गए वादों को पूरा करने के लिए 50 हज़ार करोड़ रुपए केंद्रीय योजना मद में आवंटित करने को कहा है.

सीपीएम नेता और सांसद नीलोत्पल बसु कहते हैं, "हमने 12 पोइंट रखे हैं. हम चाहते हैं कि सरकार न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर गंभीरता से विचार करे और कृषि, ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में निवेश करे."

बसु कहते हैं कि पिछले साल अंतरिम बजट में रक्षा बजट के लिए 12 हज़ार करोड़ का प्रावधान किया था. इसमें कटौती किए जाने की आवश्यकता है.

वामपंथियों ने इन क्षेत्रों में निवेश के लिए टैक्स बढ़ाने का सुझाव दिया है.

सीपीआई की केंद्रीय समिति के सदस्य शमीम फैज़ी का कहना है कि हमने सरकार से टैक्स नेट बढ़ाने का आग्रह किया है.

फैज़ी कहते हैं कि वामपंथी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के खिलाफ़ नहीं है. लेकिन तकनीकी, बैंक और एयरपोर्ट के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के हम खिलाफ़ हैं.

दरअसल इस सरकार का वित्तीय बागडोर ऐसे व्यक्तियों के हाथों में हैं जिनकी नीतियों का विरोध वामपंथी पार्टियां लगातार करती रही हैं.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम देश में आर्थिक सुधारों के झंडाबरदार रहे हैं.

ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि बजट में सरकार कैसे संतुलन साधती है.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>