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मनमोहन का वामपंथी दलों को आश्वासन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ एक बैठक की. प्रधानमंत्री आवास पर लगभग डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक में मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के अलावा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी, पार्टी महासचिव हरकिशनसिंह सुरजीत और वरिष्ठ नेता ज्योति बसु मौजूद थे. बैठक की समाप्ति के बाद पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी ने पत्रकारों को बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सभी गठबंधन सहयोगियों और सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे दलों को विश्वास में लेकर सरकार चलाने का भरोसा दिलाया है. इस बैठक में दूरसंचार, बीमा और नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में विदेशी निवेश और योजना आयोग में विदेशी सलाहकारों को शामिल किए जाने के मुद्दों पर भी चर्चा हुई. इस मामले सरकार का क्या रुख़ था यह पूछे जाने पर येचुरी ने बताया, “प्रधानमंत्री जब ब्रिटेन और अमरीका की यात्रा से लौट आएँगे तो उसके बाद वामपंथी दलों और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की समन्वय समिति की एक बैठक होगी जिसमें इन सभी सवालों पर चर्चा होगी.” पिछले कई दिनों से संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के आर्थिक निर्णयों पर वामपंथी दलों के नेता सार्वजनिक तौर पर नाराज़गी ज़ाहिर कर चुके हैं. हालाँकि शनिवार की इस बैठक के बाद वामपंथी नेता कुछ आश्वस्त तो ज़रूर नज़र आए लेकिन सरकार के पास उनकी आपत्तियों का क्या हल है, इस बारे में दोनों पक्षों ने फ़िलहाल कोई टिप्पणी नहीं की. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रविवार को ब्रिटेन और अमरीका के दौरे पर रवाना हो रहे हैं जहाँ उनके राष्ट्रपति बुश और प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से मिलने का कार्यक्रम है. मनमोहन सिंह पहले भी वामपंथी दलों को आश्वसान दे चुके हैं कि सरकार साझा न्यूनतम कार्यक्रम के अनुसार चलेगी लेकिन वामपंथी दलों पर सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखा है. |
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