| मनमोहन सिंह के इंटरव्यू पर विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत का प्रधानमंत्री बनने के बाद मनमोहन सिंह ने पहला साक्षात्कार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुखपत्र पांचजन्य को दिया है. प्रधानमंत्री ने कहा है कि वे विपक्ष को अपने ‘शत्रु’ की तरह नहीं देखते हैं लेकिन उन्होंने खेद व्यक्त किया है कि अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी जैसे ‘सज्जन’ नेताओं के होने के बावजूद संसद को काम नहीं करने दिया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने ख़िलाफ़ इस्तेमाल की जाने वाली ‘अभद्र’ भाषा से उन्हें फ़र्क नहीं पड़ता है और वे मँहगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों से निबटने पर ज़्यादा ध्यान लगा रहे हैं. विवाद हालाँकि प्रधानमंत्री की पांचजन्य के संपादक तरूण विजय के साथ मुलाक़ात केवल 10 मिनट की थी, लेकिन साक्षात्कार को लेकर विवाद शुरू ही हो गया है. कॉंग्रेस के भीतर ही कुछ नेता खिन्न हैं कि प्रधानमंत्री को अपना पहला साक्षात्कार राष्ट्रीय स्वयं संघ के प्रकाशन को दिया है जबकि लोकसभा चुनावों के दौरान उसमें छपने वाले लेखों का कॉंग्रेस लगातार विरोध करती रही है. बुधवार शाम कॉंग्रेस कार्यालय में पार्टी प्रवक्ता जयंती नटराजन से इसी विषय पर कुछ परेशान करने वाले सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा कि इसका ज़्यादा मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए. उन्होंने कहा "इसका ज़रूरत से ज़्यादा अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए. पांचजन्य ने साक्षात्कार की अर्ज़ी दी थी और उन्हें 10 मिनट का समय दिया गया था." नटराजन ने यह भी कहा कि अन्य अख़बारों को भी आगामी समय में प्रधानमंत्री के साथ साक्षात्कार के लिए समय दिया जाएगा. इस बीच विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने मौके का फ़ायदा उठाना शुरू कर दिया है. बीजेपी प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा कि पांचजन्य में केवल बीजेपी और आरएसएस के लेख नहीं होते. उसमें अन्य प्रमुख नेताओं के भी साक्षात्कार छपते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ क़रीब आ गए हैं. |
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