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एनडीए के बहिष्कार के बीच बजट पास | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के बहिष्कार के बीच लोकसभा ने वित्त विधेयक को मंज़ूरी दे दी है. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं का कहना है कि वे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के व्यवहार से बहुत क्षुब्ध हैं और इसी कारण उन्होंने लोकसभा का बहिष्कार किया. बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बजट प्रस्ताव में संशोधन को लेकर एनडीए का ज्ञापन यह कहते हुए स्वीकार करने से इनकार कर दिया था कि संसद के सत्र के दौरान ज्ञापन की क्या आवश्यकता है. लेकिन एनडीए संयोजक जॉर्ज फ़र्नांडीस का कहना है कि प्रधानमंत्री का व्यवहार ठीक नहीं था और उन्होंने एनडीए का ज्ञापन अपनी टेबल पर फेंक दिया था. मंज़ूरी एनडीए के बहिष्कार के बीच वित्त विधेयक कई संशोधनों के साथ मंज़ूर कर लिया गया. मनमोहन सरकार का पहला रेल बजट और आम बजट दोनों बिना बहस के ही पास हुए हैं. रेल बजट के दौरान एनडीए ने दाग़ी मंत्रियों का मुद्दा उठाकर रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव का बहिष्कार किया था जिसके कारण उस पर भी बहस नहीं हो सकी थी. वित्त विधेयक पास होने के बावजूद लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने इस पर निराशा व्यक्त की कि लगभग पाँच लाख करोड़ का वित्त विधेयक और अनुदान माँगे बिना किसी बहस के पारित हो रहीं हैं. सोमनाथ चटर्जी ने कहा, "यह भारतीय संसद के लिए अच्छा मौक़ा नहीं है. बिना किसी बहस के वित्त विधेयक पास होना अच्छा नहीं हो सकता." |
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