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बजट से पहले वामपंथियों ने दबाव बढ़ाया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बजट और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को लेकर वामपंथी नेताओं से गुरुवार को मुलाक़ात की. वामपंथी दूरसंचार क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 74 फीसदी करने और बैंकिंग क्षेत्र को विदेशी निवेश को खोलने से नाख़ुश हैं. वे चाहते हैं कि सरकार न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) का पालन करे. इसके पहले वामपंथी नेताओं ने वित्त मंत्री पी चिदंबरम को बजट के संबंध में प्रस्ताव भी सौंपा था जिसमें उन्होंने 50 हज़ार करोड़ रुपए योजना व्यय के लिए आवंटित किए जाने की बात कही है. वामपंथी चाहते हैं कि इस राशि को रोज़गार गारंटी योजना, कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के विकास के कार्यों में लगाया जाए. सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि आर्थिक सुधार की दिशा जनकल्याण के लिए होने चाहिए और यह बात बजट में नज़र आनी चाहिए. वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार को वामपंथी नेताओं के साथ चर्चा से काफ़ी फ़ायदा हुआ है. नाराज़गी इसके पहले सोमवार को येचुरी ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी थी कि उसका भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह न्यूनतम साझा कार्यक्रम को कितना लागू करती है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि यदि काँग्रेस न्यूनतम साझा कार्यक्रम लागू करने में नाकाम रहती है तो वामपंथी समर्थन वापसी में नहीं हिचकेंगे. सीपीएम पोलित ब्यूरो के एक अन्य महत्वपूर्ण सदस्य प्रकाश करात ने कहा था कि सरकार ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम का पालन करने का वादा किया था. लेकिन पिछले महीनों में उन्होंने ग़रीबों के लिए कुछ नहीं किया. हालांकि वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने वामपंथियों को शांत करने की कोशिश की है और कहा है कि बैंकिंग क्षेत्र को लेकर सरकार और वामपंथियों के बीच कोई मतभेद नहीं हैं. वित्त मंत्री 28 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करेंगे तभी पता चलेगा कि वामपंथी दलों की राय को कितना महत्व दिया गया है. |
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