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विदेशी निवेश बढ़ाने से वामपंथी नाराज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्र के संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के महत्वपूर्ण सहयोगी वामपंथी दलों ने संकेत दिए हैं कि बजट में विदेशी पूँजी निवेश की सीमा बढ़ाए जाने को लेकर वे ख़ुश नहीं हैं. गुरुवार को पेश किए गए बजट में बीमा, दूरसंचार और नागरिक विमानन के क्षेत्र में विदेशी पूँजी निवेश की सीमा बढ़ाए जाने की घोषणा की गई थी. वामपंथी दल पहले से ही बीमा जैसे क्षेत्र में विदेशी पूँजी निवेश का विरोध करते रहे हैं, और अब जब उनके समर्थन वाली सरकार है, यह बढ़ोत्तरी उन्हें पसंद नहीं आ रही है. बजट में दूरसंचार क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत, बीमा क्षेत्र में 26 से बढ़ाकर 49 प्रतिशत और नागरिक विमानन के क्षेत्र में 40 से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने की घोषणा की है. कुछ वामपंथी नेताओं ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि विदेशी निवेश को बढ़ाने की ज़रुरत नहीं थी. शुक्रवार को प्रकाशित अख़बारों ने वामपंथी दलों के हवाले से ऐसी भी ख़बर दी है कि वामपंथी दल इस मुद्दे को संसद में उठाने जा रहे हैं. हालाँकि संकेत हैं कि वामपंथी दल इस मामले में चर्चा के लिए तैयार हैं लेकिन अख़बारों का कहना है कि वे इस बढ़ोत्तरी को वापस लेने की भी मांग कर सकते हैं. उल्लेखनीय है कि इन मुद्दों पर बात करने के लिए 12 जुलाई को वामदलों के समर्थन वाले मज़दूर संगठनों की बैठक बुलाई गई है. |
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