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कोई संतुष्ट तो कोई निराश है बजट से | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बड़ी बड़ी कयासों और अपेक्षाओं के बीच जब गुरुवार को वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपना बजट देश के सामने रखा तो इसकी हर तरफ़ से मिली जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली. कई लोगों का मानना है कि इससे कृषि और ग्रामीण विकास को बल मिलेगा तो कई लोग इसे राजनीति से प्रेरित मानकर चल रहे हैं. ख़ासकर मजदूरों की तमाम यूनियन तो इस बजट को मजदूरों के साथ एक धोखा मान रही हैं. भारतीय मजदूर संघ के मीडिया प्रभारी अमरनाथ डोगरा ने कहा, "पिछली सरकार की तरह ही इस सरकार ने भी अपने बजट में मजदूरों की उपेक्षा की है." उन्होंने इसे निराश करने वाला बजट बताया और बीमा, नागरिक उड्डयन और दूरसंचार के क्षेत्र में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की निंदा भी की. हालांकि भारतीय उद्योग परिसंघ(सीआईआई) के निदेशक एन श्रीनिवासन ने इसे एक सकारात्मक बजट बताते हुए कहा, "लोगों को इसे भी ध्यान में रखने की ज़रूरत है कि यह बजट किन परिस्थितियों में बना है." उन्होंने कहा कि इस बजट से आर्थिक सुधार को बल मिलेगा. देश के एक बड़े उद्योग संघ फ़िक्की के सचिव अमित मित्रा बजट को प्राथमिक स्तर पर तो ठीक मानते हैं पर इसके प्रभावी तरीके से लागू होने को लेकर ख़ासे चिंतित भी हैं. मित्रा के मुताबिक, "बजट न्यूनतम साझा कार्यक्रम को ध्यान में रखकर बनाया गया है और देश की मुख्यधारा के अनुरूप है, लेकिन यह कितने प्रभावी तरीके से लागू हो सकेगा, इस पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है." उपेक्षित हैं मजदूर ट्रेड यूनियन सीटू के अध्यक्ष एमके पँधे इसे केवल अंतरिम बजट मानते हैं.
पँधे के मुताबिक़ बजट कृषि क्षेत्र के लिए तो उत्साहजनक है पर मजदूरों की उपेक्षा को लेकर वे ख़ासे नाराज़ भी है. उन्होंने कहा, "मजदूरों का 1 करोड़, 28 लाख रूपया सरकार के पास है, फिर भी सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है. अगर निजीकरण को इसी तरह बढ़ावा दिया जाएगा तो बेरोज़गारी और बढ़ेगी." एक अन्य ट्रेड यूनियन एटक के सचिव टीएन सचदेव ने इसे कृषि और ग्रामीण विकास की ओर एक मजबूत बजट बताया पर नागरिक उड्डयन, दूरसंचार और बीमा क्षेत्र में भारी विदेशी निवेश को वे ग़लत मानते हैं. उन्होंने कहा, "सरकार को इस बजट में वही मजदूर वर्ग नहीं दिखा, जिनके समर्थन से वो सत्ता में आए." ग़ौरतलब है कि सरकार ने अपने बजट में नागरिक उड्डयन और बीमा क्षेत्र में 49 प्रतिशत व दूरसंचार के क्षेत्र में 74 प्रतिशत विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी है. इससे पहले दूरसंचार में 49 प्रतिशत, नागरिक उड्डयन में 40 प्रतिशत और बीमा क्षेत्र में 26 प्रतिशत तक का विदेशी निवेश संभव था. |
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