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न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर विचार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एक वरिष्ठ नेता एबी बर्धन ने कहा कि उनकी पार्टी सरकार चलाने के लिए तैयार किए गए साझा कार्यक्रम की सभी बातें मानने के लिए बाध्य नहीं है. ग़ौरतलब है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) ने सरकार चलाने के लिए एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार किया है जिस वामपंथी दल बुधवार विचार कर रहे हैं. गठबंधन के अन्य सहयोगी दल भी बुधवार को विचार करके अपने सुझाव देने वाले हैं जिसके बाद गुरूवार को इसकी औपचारिक घोषणा होने की संभावना है. एबी बर्धन ने आज दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि उनके कुछ सुझाव न्यूनतम साझा कार्यक्रम में शामिल किए जाने चाहिए. ग़ौरतलब है कि वामपंथी दलों को आर्थिक नीतियों पर कांग्रेस के साथ कुछ मतभेद है जिन पर कोई आम राय बनाने की कोशिश की जा रही है. कांग्रेस उदारीकरण की हिमायती है जबकि वामपंथी दलों ने कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की को कंपनियाँ फ़ायदे में चल रही हैं या जिनसे फ़ायदा कमाया जा सकता है, उनका विनिवेश नहीं होना चाहिए. हालाँकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी लोक सभा अध्यक्ष का पद स्वीकार करने के लिए तैयार हो गई है जिसके बाद यह क़यास लगाए जा रहे हैं कि वह सरकार की स्थिरता के लिए समर्थन सुनिश्चित करेगी. कांग्रेस ने माकपा नेता सोमनाथ चटर्जी को लोक सभा अध्यक्ष बनाने की पेशकश की थी जिसे मान लिया गया है. |
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