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भारतीय बैंकिंग सिस्टम को चाहिए खुला आसमान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक ओर तो विदेशी बैंक भारतीय बैंकिंग प्रणाली में पूँजी निवेश के लिए अधीर हो रहे हैं, दूसरी ओर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में परस्पर विलय की ज़रुरत महसूस की जा रही है. फिर प्राइवेट बैंकों की माँग है कि सरकार सभी बैंकों पर एक समान नियम लागू करे. वित्तमंत्री पी. चिदंबरम के लिए बैंकिंग क्षेत्र में सुधार लागू कर पाना चुनौती से कम नहीं. लेकिन आम बजट 2005 से बैंकिंग कंपनियों को काफी उम्मीदें हैं. निजी बैंकों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मात्रा 49 से बढ़ाकर 74 फ़ीसदी करने का प्रस्ताव बजट 2004 में था. पर यूपीए सरकार के समर्थक वामदलों के विरोध के कारण इसे अभी तक क्रियान्वित नहीं किया जा सका है. सूत्रों का कहना है कि वामदलों ने इस मसले पर सैद्धांतिक सहमति ज़ाहिर कर दी है और सरकार बहुत जल्द इस आशय की अधिसूचना जारी कर देगी. यदि एकबारगी एफडीआई बढ़ाकर 74 फ़ीसदी नहीं भी किया गया तो 10 फ़ीसदी प्रति वर्ष की दर से एफडीआई बढ़ाकर 74 फ़ीसदी तक ले जाने की अनुमति दे दी जाएगी. वोटिंग राइट पर एफडीआई से भी नाज़ुक मसला है 'वोटिंग राइट' का.
रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार निजी बैंक में किसी निवेशक की हिस्सेदारी चाहे जितनी हो, उसका वोटिंग राइट 10 फ़ीसदी तक सीमित है. साथ ही कोई एक कंपनी किसी बैंक में 10 फ़ीसदी से अधिक की इक्विटी भागीदारी नहीं रख सकती. हाल ही में रिज़र्व बैंक ने निजी बैंकों को निर्देश जारी किया है कि यदि किसी एक कंपनी की हिस्सेदारी 10 फ़ीसदी से ज़्यादा है तो आगामी तीन वर्षों की अवधि में इसे घटाकर 10 फ़ीसदी के स्तर पर लाया जाए. बैंकिंग समुदाय की माँग है कि 'वोटिंग राइट' को इक्विटी हिस्सेदारी से जोड़ा जाए. मसलन, जितनी अधिक इक्विटी होल्डिंग, उतना ही 'वोटिंग राइट'. उम्मीद है कि आम बजट 2005 में वित्तमंत्री इस समस्या का निदान पेश करेंगे. बैंकों का विलय निजी बैंकों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक(पीएसबी) भी कसमसा रहे हैं. उन्हें अलाभकारी शाखाओं को बंद करने और नई शाखाएँ खोलने की स्वतंत्रता भी नहीं है. इसके लिए बैंकों को रिज़र्व बैंक से अनुमति लेनी पड़ती हैं. वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि आम बजट 2005 में चिदंबरम बैंकिंग अधिनियम 1949 में कुछ संशोधन का प्रस्ताव रखेंगे. इससे बैंकों को शाखा कार्यालय खोलने की छूट के साथ-साथ कमॉडिटी ट्रेडिंग का तोहफ़ा भी मिल जाएगा.
वित्तमंत्री पी. चिदंबरम बैंकों के परस्पर विलय के पक्षधर हैं. इस समय भारत में कुल 19 पीएसबी हैं. वित्तमंत्री चाहते हैं कि भारत में 5-6 बड़े बैंक हो जो वैश्विक बैंकों का मुकाबला कर सकें. बैंकिंग रिफॉर्म्स से संबंधित नरसिम्हन समिति ने भी बैंकों के परस्पर विलय की रिफारिश की थी. चिदंबरम ने संकेत दिए हैं कि बैंकों के विलय की विस्तृत रूपरेखा जल्द ही प्रस्तुत की जाएगी. इस मुद्दे पर उन्होंने वामपंथी दलों के विरोध को अनसुना कर दिया है. वामपंथी दलों को आशंका है कि बैंकों के विलय से नौकरियाँ कम हो जाएँगी, कर्मचारियों की छंटनी होगी, बैंकों का निजीकरण कर दिया जाएगा, प्राथमिक क्षेत्र में निवेश प्रभावित होगा. इस मसले पर संसद में बहस हो चुकी है और बजट 2005 में बैंकिंग विलय की व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत किए जाने का अनुमान है. भारत सरकार पीएसबी में सरकार की हिस्सेदारी घटाकर 51 फ़ीसदी करने पर आमादा है. कुल 19 में से चार पीएसबी में सरकार की हिस्सेदारी 100 फ़ीसदी है. अन्य बैंकों में भी 60 से 76 फ़ीसदी इक्विटी भागीदारी है.
इसे कम करने के लिए बैंक पब्लिक इश्यू लाएँगे. विजया बैंक और देना बैंक दूसरी बार पूँजी बाज़ार में जाने वाले हैं. इहालाबाद बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स फौलो-अप इश्यू लेकर आ रहे हैं. उल्लेखनीय है कि बैंक नेशनलाइजेशन एक्ट 1970 और 1980 के अनुसार पीएसबी में सरकार की हिस्सेदारी न्यूनतम 51 फ़ीसदी होनी चाहिए. प्राइवेट बैंकों की शिकायत है सरकार उनके साथ भेदभाव करती है. मसलन पीएसबी पर नेशनल बैंकिंग एक्ट लागू होता है तो स्टेट बैंक पर एसबीआई एक्ट. प्राइवेट बैंक, कंपनी अधिनियम द्वारा शासित होते हैं. उम्मीद की जा रही है कि सरकार प्राइवेट बैंकों को बराबरी का मौका देगी. |
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