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शेयर बाज़ार में भारी उछाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई शेयर बाज़ार में मंगलवार को ख़ासा सुधार हुआ और सुबह के मुक़ाबले शेयरों कीमतें 8.6 प्रतिशत ऊपर चली गईं. दिन का कारोबार पूरा होने पर सूचकांक 4,893.64 अंक पर बंद हुआ. सोमवार को सूचकांक में 564 अंक की ऐतिहासिक गिरावट हुई थी. लेकिन मंगलवार को कारोबार शुरु होने के कुछ ही मिनटों के भीतर सूचकांक 264 अंक ऊपर, 4750 अंक पर चला गया. सोमवार को एक समय प्रमुख शेयरों का सूचकांक सेंसेक्स 16 प्रतिशत नीचे गिर गया था और 842.37 अंक नीचे जाकर 4227 पर पहुँच गया था. मुंबई शेयर बाज़ार के 129 साल के इतिहास में पहली बार शेयरों की कीमतें इतना नीचे चली गई थीं. स्थिति बेक़ाबू होती देख दो-दो बार कारोबार को रोकना भी पड़ा. कारण शेयर बाज़ार में मची हड़कंप का कारण निवेशकों में केंद्र की नई सरकार की आर्थिक नीतियों के प्रति संदेह बताया गया था. इसे देखते हुए काँग्रेस की पिछली सरकारों में वित्त मंत्री रह चुके नेताओं मनमोहन सिंह और प्रणब मुखर्जी ने निवेशकों को आर्थिक नीति के बारे में भरोसा दिलाया. इसके बाद दोपहर में हालत संभली और शेयरों के भाव पाँच प्रतिशत ऊपर चढ़े. मुंबई शेयर बाज़ार के सूचकांक में सोमवार को कारोबार बंद होते-होते लगभग 264 अंकों का सुधार हुआ और सूचकांक 4500 से ऊपर जाकर बंद हुआ. शेयर बाज़ार की उथल-पुथल का असर मुद्रा बाज़ार पर भी पड़ा और डॉलर के मुक़ाबले रूपए की क़ीमत आठ महीने के न्यूनतम स्तर पर चली गई. लेकिन फिर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के हस्तक्षेप के बाद रूपए की कीमत में स्थिरता आई. यहाँ उल्लेखनीय है कि 1999 में जिस दिन अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री बने थे, उस दिन मुंबई में शेयरों के भाव ऐतिहासिक रूप से ऊपर चले गए थे और सूचकांक 5000 अंक से ऊपर जाकर बंद हुआ था. |
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