|
शेयर बाज़ार बुधवार को कुछ सुधरा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों और त्रिशंकु लोकसभा की बढ़ती संभावना का असर शेयर बाज़ार पर भी पड़ा और दो दिन की लगातार गिरावट के बाद बुधवार को कुछ सुधरा भी. सोमवार को मुंबई शेयर बाज़ार का सूचकाँक दो प्रतिशत गिरकर 5555 अंकों की गिरावट हुई थी. मंगलवार को भी शेयर बाज़ार में क़रीब 242 अंकों की गिरावट आई जो क़रीब 4.4 प्रतिशत थी और यह क़रीब चार साल में सिर्फ़ एक दिन में दर्ज की गई सबसे ज़्यादा गिरावट थी. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर भी इसका असर स्पष्ट देखा गया. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ़्टी भी क़रीब 70 अंक गिरा और सूचकांक 1700 के भी नीचे चला गया था. लेकिन दो दिन की गिरावट के बाद बुधवार को कुछ सुधार हुआ और मुंबई सूचकांक 32.45 बढ़कर 5358.35 पर बंद हुआ. जानकारों का कहना है कि त्रिशंकु लोकसभा के डर को देखते हुए बाज़ार में कुछ ज़्यादा ही तेज़ी से प्रतिक्रिया हुई. जानकार यह भी कहते हैं कि लोकसभा चुनाव के गुरूवार को आने वाले नतीजों का भी बाज़ार पर असर पड़ेगा. मंगलवार को बिकवाली का ऐसा आलम था कि रिलायंस के शेयर छह फ़ीसदी, टाटा मोटर्स के सात फ़ीसदी, टाटा पॉवर के आठ फ़ीसदी, एचपीसीएल के 8.9 फ़ीसदी और बीपीसीएल के शेयर 8.3 फ़ीसदी गिरे. गुजरात अंबुजा सिमेंट के शेयरों में चार फ़ीसदी और ग्रासिम के शेयरों में तीन प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. जानकारों का कहना है कि निवेशकों को इस बात का भय सता रहा है कि केंद्र में राजग सरकार के न बनने से सुधारों की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है. लेकिन कई विश्लेषकों का यह भी कहना है कि सरकार बनने की दिशा में बन रही अनिश्चतता इसके पीछे मुख्य वजह है. जानकार ये भी बताते हैं शायद 13 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद भी शेयर बाज़ार में कुछ दिनों तक गिरावट जारी रह सकती है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||