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मुंबई शेयर बाज़ार में चिंता, सूचकांक गिरा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लोकसभा चुनाव के परिणामों की घोषणा के दिन बाज़ार की उथल पुथल शाम तक जाकर संभली तो ज़रूर लेकिन फिर दूसरे दिन मामला एक बार फिर से फिसलता हुआ दिखा. नई सरकार में जैसे जैसे वामपंथी दलों की पैठ की ख़बर गर्म होती गई, शेयर सूचकांक उसी अनुपात में लुढ़कता नज़र आया. बाज़ार बंद होते होते सेंसेक्स 330 अंक नीचे जा चुका था. बाज़ार विशेषज्ञों का कहना था कि वामपंथी दल सीपीआई के महासचिव एबी बर्धन के विनिवेश के विरोध में दिए गए बयानों ने रही सही कसर भी पूरी कर दी. एबी बर्धन से जब पत्रकारों ने पूछा तो उन्होंने बिना किसी लागलपेट के कहा कि विनिवेश मंत्रालय का गठन ही एक बहुत बड़ी गलती थी. गिरावट उन शेयरों में सबसे भारी गिरावट दिखी जिनमें एनडीए सरकार ने महत्वपूर्ण विनिवेश की घोषणा की थी. हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के शेयरों में 13 प्रतिशत की गिरावट आई तो शिपिंग कार्पोरेशन का शेयर 17 प्रतिशत लुढ़का. मुंबई शेयर बाज़ार के दलाल विजय तिलकराज ने बीबीसी को बताया कि बाज़ार को ये बिलकुल पसंद नहीं कि किसी पूंजीवादी व्यवस्था में वामपंथी दलों की पैठ हो जाए और उनकी नीति उदारीकरण पर हावी हो जाए. उन्होंने कहा, "आनेवालों दिनों में बाज़ार की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि कांग्रेस सरकार बनाने के क्रम में किस हद तक वामपंथी दलों से समझौता करने को तैयार है." चिंता बाज़ार की सबसे बड़ी चिंता यही है कि वामपंथी दलों के आने से सुधार की गति धीमी हो जाएगी. दिल्ली शेयर बाज़ार के पूर्व अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने बीबीसी से बात करते हुए आशंका जताई कि "शायद वामपंथी दल आर्थिक सुधारों की गति को धीमा कर दें."
विशेषज्ञों का कहना है कि सुधारों की गति इस बात पर भी निर्भर करेगी कि कप्तान कौन होगा और किस हद तक वो झुकने को तैयार होगा. बाज़ार में गिरावट की शुरूआत ओएनजीसी और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया जैसे सरकारी उपक्रम के शेयरों की बिक्री के साथ हुई. अफ़वाहें ऐसी भी थीं कि बाज़ार की ये गिरावट सोची समझी योजना के तहत है और कुछ खिलाड़ी इसकी दिशा तय कर रहे हैं. शेयर दलाल विजय तिलकराज कहते हैं इस तरह की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता लेकिन इतनी जल्दी ऐसा हो सकता है ऐसे अभी संकेत नहीं मिले हैं. शेयर बाज़ार की गिरावट का असर रूपए पर भी देखने को मिला और रूपया डॉलर के मुक़ाबले आधा प्रतिशत और कमज़ोर बंद हुआ. |
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