सुस्त पड़ी चीन और भारतीय अर्थव्यवस्था

इमेज स्रोत, AFP
पिछली तिमाही चीनी अर्थव्यवस्था की विकास दर हाल के सालों में सबसे धीमी रही.
वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद विकास दर 8.1 फीसदी रही. जबकि इसके पहले की अवधि में ये 8.9 प्रतिशत थी.
दुनियां की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, चीन के सकल घरेलू उत्पाद की ये विकास दर, पिछले तीन सालों में सबसे कम है.
विश्व बैंक ने गुरूवार को कहा कि अगामी माह में चीनी अर्थव्यवस्था की गति और धीमी होगी.
चीन के लिए बैंक के प्रमुख अर्थशास्त्री आरडो हैनसन ने कहा, "चीन की अर्थव्यवस्था में साल 2012 में क्रमश: धीमापन जारी रहेगा क्योंकि मांग में कमी आएगी, निवेश में हो रही कमी को और अधिक महसूस किया जाएगा और बाहर से माल की जो मांग है वो कम रहेगी."
भारत
इस बीच पड़ोसी मुल्क भारत में जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2012 में औद्योगिक विकास की दर 4.1 फीसद रही. हालांकि ये नवंबर से अबतक की सबसे बेहतर दर है.
साथ ही सरकार की सांख्यिकी विभाग ने जनवरी माह की दर को पहले जारी 6.8 प्रतिशत से घटाकर 1.1 कर दिया है.
इसपर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि इन आंकड़ों का असर अगले सप्ताह जारी होनेवाली मौद्रिक नीति पर पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि सरकार रिजर्व बैंक के साथ मिलकर अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए जरूरी कदम उठाएगी.

इमेज स्रोत, AFP
प्रणव मुखर्जी के इस बयान से समझा जा रहा है कि रिजर्व बैंक 17 अप्रैल की बैठक के बाद श्रण दर में कटौती कर सकता है.
उद्योग जगत हाल के दिनों में बार-बार कहा जाता रहा है कि जमीन अधिग्रहण में आ रही दिक्कतों, पर्यावरण नीतियों और सरकार के कई फैसलों - जैसे 2जी के अदालत के समक्ष होने से निवेश धीमा पड़ रहा है.
मंहगाई की बढ़ी दर के कारण भी ब्याज की दर ऊंची रही थी जिसने जानकारों के मुताबिक उद्योग जगत पर अपना प्रभाव डाला.
मांग
चीन की अर्थव्यवस्था के धीमेपन की वजह अमरीका और यूरोप जैसे बाजारों से माल की मांग में आई कमी है.
साथ ही आंतरिक मांग भी नहीं बढ़ पा रही.
विश्व बैंक ने साल 2012 में चीनी अर्थव्यस्था की विकास दर के पहले घोषित किए आंकड़े को घटाकर 8.2 प्रतिशत कर दिया है.
विश्व बैंक ने कहा है कि चीन के निर्यात क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में आया धीमापन और चीन की प्रॉपर्टी बाजार में गिरावट आने वाले दिनों में विकास के लिए खतरा बन सकते हैं.
देश के मुख्य बैंक ने हाल के दिनों में कर्ज मिलने को मंहगा बनाया है ताकि प्रॉपर्टी बाजार और मंहगाई को काबू में रखा जा सके.
लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि सरकार के निर्णयों का सकारात्मक प्रभाव हुआ है ये जरूरी है कि विकास दर बनाए रखने और मंहगाई को काबू रखने के लक्ष्य में संतुलन कायम किया जाए.












