राजकोट गेम ज़ोन हादसा: फ़ैब्रिकेशन शीट और लोहे से बना था टीआरपी गेम ज़ोन

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राजकोट के टीआरपी गेम ज़ोन में लगी आग में अब तक 27 लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हैं.
आग इतनी भीषण थी कि कुछ ही मिनटों में पूरा गेम ज़ोन जलकर खाक हो गया.
कई मृतकों के शव बुरी तरह जल गए थे जिस कारण उनकी पहचान नहीं हो पा रही थी. मृतकों की पहचान के लिए पुलिस शवों का डीएनए परीक्षण करा रही है.
पुलिस के अनुसार अगले 48 घंटे में डीएनए जांच रिपोर्ट आने की उम्मीद है.
इस हादसे के कारण राजकोट के स्थानीय अधिकारियों, गेम ज़ोन के मालिकों, ज़िम्मेदार अधिकारियों और गुजरात सरकार पर सवाल उठ रहे हैं.
लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि गेम ज़ोन में इतनी भीषण आग कैसे लगी.

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गुजरात सरकार ने आग के कारणों की जांच के लिए स्पेशल जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया है.
सूत्रों का कहना है कि टीआरपी गेम ज़ोन जहां आग लगी, वह सीमेंट कंक्रीट का ढांचा नहीं था.
वहीं फ़ायर ब्रिगेड का कहना है कि जिस टीआरपी गेम ज़ोन में आग लगी, वहां के प्रबंधन ने फ़ायर सेफ्टी को लेकर अनुमति नहीं ली थी.
अब सवाल यह है कि अगर फ़ायर सेफ्टी की इजाज़त नहीं ली गई थी तो इस गेम ज़ोन का प्रबंधन कैसे किया जा रहा था और अगर ऐसा था कि गेम ज़ोन को बिना इजाज़त चलाया जा रहा था तो इसे रोकने की कोशिश क्यों नहीं की गई?
ढांचा फ़ैब्रिकेशन शीट से बनाया गया था-पुलिस

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पुलिस ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है और छह लोगों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 304, 308, 337, 338, 114 के तहत मामला दर्ज कर लिया है.
समाचार एजेंंसी एनएनआई के मुताबिक़ अधिकारियों ने बताया कि टीआरपी गेम ज़ोन के मालिक युवराज हरी सिंह सोलंकी, मैनेजर नितिन जैन और अन्य के ख़िलाफ़ राजकोट तालुका पुलिस स्टेशन में एफ़आईआर दर्ज की गई है.
पुलिस ने टीआरपी गेम ज़ोन में पार्टनर धवल कॉर्पोरेशन के मालिक धवल ठक्कर और टीआरपी गेम ज़ोन के संचालकों में रेस वे एंटरप्राइजे़ज़ के पार्टनर अशोक सिंह जडेजा, किरीट सिंह जडेजा, प्रकाश चंद हीरन, युवराज सिंह सोलंकी और राहुल राठौड़ के ख़िलाफ़ जांच शुरू कर दी है.

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पुलिस एफ़आईआर में कहा गया है, "इन सभी लोगों ने लोहे और फ़ैब्रिकेशन शीट की मदद से लगभग 50 मीटर चौड़ी और लगभग 60 मीटर लंबी और दो से तीन मंजिला ऊंची संरचना का निर्माण किया और इसे एक गेम ज़ोन बना दिया था."
पुलिस एफ़आईआर में यह भी कहा गया है कि इस ख़तरनाक क्षेत्र में आग रोकने और इंसान की जान बचाने के लिए प्रभावी अग्नि सुरक्षा उपाय नहीं किए गए थे. साथ ही फ़ायर ब्रिगेड से एनओसी या प्रमाण पत्र प्राप्त किए बिना ये गेम ज़ोन चलाया जा रहा था.
एफ़आईआर में कहा गया है कि इस गेम ज़ोन के संचालकों ने यह जानकारी होने के बावजूद गेम ज़ोन चलाकर अपराध किया है कि उनके परिसर में मामूली या गंभीर चोट से व्यक्ति की मौत की भी संभावना है.

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पार्टी प्लॉट पर बनाया गया था गेम ज़ोन

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पुलिस ने अपनी शिकायत में ये कहा है कि एस. धवल कॉर्पोरेशन और रेस वे एंटरप्राइजे़ज़ के साझेदारों के संयुक्त स्वामित्व वाली पार्टी प्लॉट और आशुतोष पार्टी प्लॉट टीआरपी को गेम ज़ोन के रूप में उपयोग करके इनडोर और आउटडोर गेम गतिविधियां चला रहे थे.
इनमें इनडोर गेम ज़ोन सेक्शन को दो से तीन मंजिल ऊंची और लगभग 60 मीटर लंबी और लगभग 50 मीटर चौड़ी फैब्रिकेशन संरचना पर बनाया गया था. ये चारों ओर से टिन की चादरों से ढंकी हुई थी.
बाहर खुली जगह में मैदान बनाया गया था.
यह टीआरपी गेम ज़ोन अस्थायी ढांचा था जिसे बनाने के लिए मूल रूप से लोहे के एंगल और टिन की गैल्वेनाइज्ड शीटों का उपयोग किया गया था.
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इसमें अलग-अलग सेक्शन में अलग-अलग गेम ज़ोन बनाया गया था. इस ढांचे में बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रिक वायरिंग का इस्तेमाल हुआ था और इसमें एयर कंडीशनर वेंट भी लगाए गए थे.
इस पूरे ज़ोन में आग से बचाव के लिए ज़रूरी अग्नि सुरक्षा उपकरण काम नहीं कर रहे थे.
राजकोट पुलिस कमिश्नर राजू भार्गव ने कहा है कि जिन छह लोगों पर एफ़आईआर दर्ज की गई है उनमें से दो लोग हिरासत में ले लिए गए हैं.
उन्होंने बताया कि एफ़एसएल टीम मामले में सबूत इकट्ठा कर रही है. उन्होंने कहा, "हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द इस मामले में आरोपपत्र दायर किया जाए."
राज्य सरकार ने हादसे की जांच के लिए पांच सदस्यों की एसआईटी का गठन किया है. एसआईटी को 72 घंटे के अंदर इस मामले की जांच रिपोर्ट देनी है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार एसआईटी शनिवार देर रात राजकोट पहुंच चुकी है और टीम के सदस्यों ने स्थानीय प्रशासन के साथ मीटिंग भी की है

आग कैसे लगी?
घटना के कारणों के बारे में बताते हुए पुलिस कमिश्नर ने कहा कि गेम ज़ोन के अंदर फ़ैब्रिकेशन का काम जारी था और वहां बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामान रखा गया था.
राजकोट के पुलिस कमिश्नर राजू भार्गव ने बताया है कि हादसे के कारणों की पूरी जांच की जाएगी.
उन्होंने कहा है कि इस हादसे के बाद शहर के सभी गेमिंग ज़ोन को बंद करने के आदेश दे दिए गए हैं. ये भी देखा जा रहा है कि कौन-कौन से गेम ज़ोन ने प्रशासन ने ज़रूरी परमिशन न नहीं लिए हैं.
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